पुलिस की वर्दी न्याय, सुरक्षा और जनता के विश्वास का प्रतीक होती है। लेकिन जब कुछ अधिकारी अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हैं, तो केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे विभाग की प्रतिष्ठा पर सवाल उठने लगते हैं।
हाल ही में पंजाब पुलिस के एक अधिकारी की गिरफ्तारी की खबरों ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। निस्संदेह, कानून के अनुसार हर व्यक्ति तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक अदालत उसे दोषी सिद्ध न कर दे। लेकिन यदि कोई अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करता है, तो उसे भी एक सामान्य नागरिक की तरह कानून का सामना करना चाहिए।
पंजाब ने वह दौर भी देखा है जब हिंसा और कठोर कार्रवाई के बीच अनेक परिवार बिखर गए। आज भी बहुत से लोग उस समय के दर्द को भूला नहीं पाए हैं। इतिहास हमें यही सिखाता है कि कानून की ताकत का इस्तेमाल केवल न्याय के लिए होना चाहिए, डर पैदा करने के लिए नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार किसी अधिकारी को सम्मान, अच्छा वेतन और बड़ी जिम्मेदारी देती है, तो फिर आम लोगों को परेशान करने या गैरकानूनी लाभ कमाने की जरूरत क्यों पड़ती है? असली ताकत लोगों को डराने में नहीं, बल्कि उनका विश्वास जीतने में है।
समाज की केवल एक ही अपेक्षा है—कानून सबके लिए समान हो। यदि कोई दोषी है तो उसे सज़ा मिले, और यदि निर्दोष है तो उसे न्याय मिले। वर्दी का सम्मान तभी बना रहेगा, जब उसके साथ ईमानदारी, जवाबदेही और न्याय भी जुड़ा होगा।
वर्दी का सम्मान या जनता का डर?….पुलिस की वर्दी न्याय, सुरक्षा और जनता के विश्वास का प्रतीक
Bhag Singh Atwal
Surrey BC Canada.
