विभिन्न चुनौतियों के बावजूद सरकार ने तीन वर्ष का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूर्ण किया: राजेश धर्माणी

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मल्टीडिसीप्लिनरी इंस्टीट्यूट ऑफ इनोवेशन, स्किल, टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (एमआईआईएसटीईआर) में अगले सत्र से शुरू होंगी कक्षाएं
घुमारवीं में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान बोले तकनीकी शिक्षा मंत्री
एएम नाथ। बिलासपुर 01 जनवरी: नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एंव औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं, आर्थिक दबावों एवं राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद अपना तीन वर्ष का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। इन तमाम कठिन परिस्थितियों के बीच भी प्रदेश सरकार ने जनहित, जनकल्याण तथा प्रदेशवासियों के उत्थान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य किया है। राजेश धर्माणी आज घुमारवीं स्थित लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से प्रदेश हित में अपेक्षाकृत सहयोग नहीं मिला है। वर्ष 2023 में प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रदेश सरकार ने अपने सीमित आर्थिक संसाधनों से 4500 करोड़ रुपये का विशेष राहत पैकेज जारी किया। इसके विपरीत प्रदेश सरकार द्वारा केंद्र सरकार से 9300 करोड़ रुपये की राहत की मांग की गई थी, जिसके सापेक्ष केंद्र से केवल 1500 करोड़ रुपये ही स्वीकृत किए गए, वह भी दो किश्तों में।
उन्होंने बताया कि पूर्व में केंद्रीय सहायता के रूप में प्रदेश को लगभग 11,432 करोड़ रुपये प्राप्त होते थे, जो अब घटकर मात्र 3,257 करोड़ रुपये रह गए हैं। इसके साथ ही जीएसटी क्षतिपूर्ति (कंपनसेशन) भी बंद कर दी गई है, जिसके चलते यह राशि लगभग 11 हजार करोड़ रुपये से घटकर केवल 300 करोड़ रुपये रह गई है, जिससे प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
मंत्री ने कहा कि इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने हिमाचल के हितों की रक्षा करते हुए महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में प्रदेश सरकार ने हिमाचल के पक्ष में लगभग 300 करोड़ रुपये प्राप्त किए हैं तथा इससे वर्तमान में प्रति माह लगभग पौने दो करोड़ रुपये की नियमित आय हो रही है। इसी प्रकार जेएसडब्ल्यू मामले में भी प्रदेश सरकार ने माननीय उच्चतम न्यायालय में प्रदेश हित में मुकदमा जीतकर लगभग 250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व सुनिश्चित किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि बीबीएमबी से संबंधित मामलों में भी प्रदेश का लगभग 4500 करोड़ रुपये का बकाया मिलना अभी शेष है, जिसके लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। इसके अतिरिक्त प्रदेश की ऋण सीमा (लोन लिमिट) को भी कम किया गया है। ओल्ड पेंशन स्कीम लागू होने के कारण प्रदेश की लगभग 1600 करोड़ रुपये की ऋण सीमा में कटौती की गई है। उन्होंने कहा कि एनपीएस के तहत प्रदेश के कर्मचारियों का लगभग 9500 करोड़ रूपया केन्द्र के पास है जिसे भी प्रदेश को वापिस दिया जाना चाहिए।
राजेश धर्माणी ने कहा कि शानन पन बिजली परियोजना को भी प्रदेश हित में हिमाचल को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने प्रदेश के केंद्रीय सरकार में शामिल नेताओं से मध्यस्थता कर इसे हिमाचल को सौंपने की वकालत भी की। उन्होंने केंद्रीय सरकार से प्रदेश के लंबित सभी बकाया राशि को जारी करने का भी आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के माध्यम से प्रदेश के लगभग 6500 बच्चों को लाभान्वित किया जा रहा है। प्रदेश मंत्रिमंडल ने अब ऐसे अभिभावकों के बच्चों को भी सुख आश्रय योजना में शामिल किया है जो 70 प्रतिशत तक दिव्यांग हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जिनके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। प्रदेश में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान बनाए जा रहे हैं जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है। प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों को सशक्त किया जा रहा है तथा नए पदों को सृजित कर उन्हें भरा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में अहम सुधार करते हुए प्रदेश में सीबीएसई बोर्ड से संबद्धता प्राप्त लगभग 120 स्कूलों को स्थापित किया जा रहा है जिसमें से 4 स्कूल घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के हैं। इन स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रत्येक स्कूल को एक-एक करोड़ स्वीकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त इन स्कूलों में तीन-तीन अंग्रेजी व गणित के अध्यापकों की भी नियुक्ति की जाएगी।
उन्होंने कहा कि घुमारवीं में सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत मल्टीडिसिप्लिनरी इंस्टिट्यूट ऑफ इनोवेशन, स्किल, टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (एमआईआईएसटीईआर) की स्थापना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस विश्वविद्यालय के स्थापित हो जाने पर प्रदेश के युवाओं को नवाचार, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास तथा उद्यमिता के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण अवसर उपलब्ध होंगे। संस्थान की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है जिसके तहत लगभग 250 बीघा भूमि अधिकृत की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय में अगले शैक्षणिक सत्र से कुछ विषयों की कक्षाएं प्रारंभ कर दी जाएंगी।
इस अवसर पर कांग्रेस नेता विवेक कुमार, एपीएमसी अध्यक्ष सतपाल वर्धन, नगर परिषद अध्यक्षा रीता सहगल भी मौजूद रहीं।
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