एसआईआर में मतदाताओं के नाम हटाने पर उठाए सवाल
शिमला। हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने अपने दिवंगत पिता और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण को लेकर नाराजगी की खबरों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से कोई असंतोष नहीं है और इस संबंध में लगाए जा रहे कयास विपक्षी भाजपा की ओर से फैलाए जा रहे हैं।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि शिमला में भी वीरभद्र सिंह की प्रतिमा का अनावरण राष्ट्रीय और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की मौजूदगी में किया गया था। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं से मिल रहे समर्थन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका ध्यान जनकल्याण और लोगों की समस्याओं को उठाने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि चुनावी परिणाम जनता तय करती है।
कांग्रेस नेतृत्व के प्रति जताई एकजुटता
कांग्रेस में अलग-अलग नेताओं और विचारों का उल्लेख करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी के नेतृत्व के प्रति निष्ठा जताई। साथ ही हिमाचल प्रदेश के विकास में पूर्व मुख्यमंत्रियों यशवंत सिंह परमार, ठाकुर राम लाल और वीरभद्र सिंह के योगदान को याद करते हुए उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई।
एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मंत्री ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के दावों पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, मतदाता सूची में इस तरह के बदलावों की पारदर्शिता और प्रक्रिया की निष्पक्षता की जांच जरूरी है।
विक्रमादित्य सिंह ने दावा किया कि लगभग 13 करोड़ नाम हटाए जाने का मुद्दा गंभीर है और इससे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल कांग्रेस का मुद्दा नहीं, बल्कि सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों की चिंता से जुड़ा विषय है।
