पुनीत महाजन | चंडीगढ़, 31 मई : चंडीगढ़ पुलिस के साइबर क्राइम थाना ने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी मामले का सफलतापूर्वक पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मामला अनधिकृत सिम स्वैपिंग (SIM Swapping) और एक कॉर्पोरेट बैंक खाते से 81.89 लाख रुपये की धोखाधड़ी से निकासी से संबंधित है।
यह कार्रवाई यूटी चंडीगढ़ की एसपी साइबर गीतांजलि खंडेलवाल, आईपीएस के निर्देशन, डीएसपी साइबर क्राइम के मार्गदर्शन तथा थाना साइबर क्राइम, सेक्टर-17 के प्रभारी की निगरानी में की गई। इस संबंध में थाना साइबर क्राइम, चंडीगढ़ में एफआईआर नंबर 53 दिनांक 07.04.2026 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
गिरफ्तार आरोपी
1. राजदीप घोष (22 वर्ष) निवासी मसलानपुर, नॉर्थ 24 परगना, पश्चिम बंगाल।
2. तनय दास (26 वर्ष) निवासी नोआपारा, नॉर्थ 24 परगना, पश्चिम बंगाल।
मामला क्या है?
यह मामला सेक्टर-17 स्थित अल्फा फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड के एक कर्मचारी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने बताया कि कंपनी के बैंक खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर अचानक नेटवर्क से बाहर हो गया। बाद में जांच में सामने आया कि मोबाइल नंबर को धोखाधड़ी से सिम स्वैप कर लिया गया था।
आगे की जांच में पता चला कि बैंक खाते से जुड़े मुख्य और वैकल्पिक दोनों मोबाइल नंबरों से छेड़छाड़ की गई थी, जिससे साइबर अपराधियों को बैंक खाते तक अनधिकृत पहुंच मिल गई और उन्होंने 81.89 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर ली।
जांच में बड़ा खुलासा
तकनीकी विश्लेषण और फील्ड जांच के आधार पर पुलिस टीम पश्चिम बंगाल पहुंची, जहां से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि आरोपी संगठित साइबर अपराधियों को बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराकर धोखाधड़ी में मदद करते थे।
जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की गई राशि का एक हिस्सा आरोपी तनय दास के बैंक खाते में जमा हुआ था। मामले में इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड का भी पता लगाया गया। आरोपियों ने अन्य फरार साथियों की संलिप्तता की जानकारी भी पुलिस को दी है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, बैंकिंग उपकरण, एटीएम कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं।
जांच जारी
पुलिस अब इस साइबर धोखाधड़ी से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के साथ-साथ पूरे धन प्रवाह (मनी ट्रेल) का पता लगाने में जुटी हुई है।
आम जनता के लिए सलाह
किसी भी सत्यापन, गिरफ्तारी से बचने या फर्जी मामलों के निपटारे के नाम पर पैसे ट्रांसफर न करें।
अपनी पहचान संबंधी दस्तावेज केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही साझा करें।
किसी अन्य व्यक्ति को अपना बैंक खाता या सिम कार्ड उपयोग के लिए न दें।
अपने नाम पर जारी सिम कार्डों की जानकारी TAFCOP पोर्टल के माध्यम से समय-समय पर जांचते रहें।
व्हाट्सएप में अज्ञात कॉल को साइलेंट करने की सुविधा का उपयोग करें।
आधार बायोमेट्रिक को लॉक रखें ताकि उसका दुरुपयोग न हो सके।
किसी भी संदिग्ध कॉल या साइबर धोखाधड़ी की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।
