30 सितंबर से 6 अक्टूबर तक विधायकों के कार्यालयों के बाहर होंगे प्रदर्शन; किसान-मजदूर मुद्दों और पंजाब के विभिन्न मामलों को लेकर उठाई आवाज
गढ़शंकर, 16 सितंबर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की पंजाब इकाई की प्रदेश स्तरीय कन्वेंशन बुधवार को गढ़शंकर स्थित याकोहामा रिजॉर्ट में आयोजित की गई। कन्वेंशन की अध्यक्षता कामरेड भूप चंद चन्नों ने की, जबकि मंच संचालन पार्टी के प्रदेश सचिवालय सदस्य कामरेड गुरनेक सिंह भज्जल ने किया। वरिष्ठ नेता कामरेड दर्शन सिंह मट्टू ने पंजाबभर से पहुंचे प्रतिनिधियों और पार्टी नेताओं का स्वागत किया।
कन्वेंशन में सीपीआई(एम) के केंद्रीय सचिवालय सदस्य एवं पंजाब के सह-प्रभारी कामरेड के.एन. उमेश, केंद्रीय सचिवालय सदस्य कामरेड बिक्रम सिंह और पंजाब इकाई के प्रदेश सचिव कामरेड सुखविंदर सिंह सेखों विशेष रूप से उपस्थित रहे।
30 सितंबर से प्रदेशभर में प्रदर्शन का ऐलान
प्रदेश सचिव सुखविंदर सिंह सेखों ने मुख्य प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि 30 सितंबर से 6 अक्टूबर तक पंजाब के विधायकों के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किए जाएंगे और मुख्यमंत्री के नाम मांग-पत्र भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि संघर्ष के अगले चरण में 10 दिसंबर को मुख्यमंत्री के संगरूर स्थित आवास की ओर रोष मार्च कर घेराव किया जाएगा।
सेखों ने केंद्र सरकार की श्रम नीतियों, मनरेगा से संबंधित नए कानून और किसानों-मजदूरों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि केंद्र की नीतियों से किसानों, मजदूरों और मेहनतकश वर्ग की समस्याएं बढ़ी हैं। उन्होंने नए श्रम कानूनों को वापस लेने की मांग भी उठाई।
उन्होंने मनरेगा की जगह एक जुलाई 2026 से लागू किए गए वीबी ग्राम(जी) कानून का भी विरोध किया। उनके अनुसार, पहले मनरेगा में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी क्रमश: 90 और 10 प्रतिशत थी, जबकि नए प्रावधानों में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे ग्रामीण रोजगार व्यवस्था प्रभावित होगी।
पंजाब के कानून-व्यवस्था के मुद्दे भी उठाए
सेखों ने पंजाब में कानून-व्यवस्था, नशे और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने गैंगस्टर गतिविधियों, फिरौती, हत्या, अपहरण और लूट की घटनाओं पर चिंता जताई। नशे के कारण युवाओं की मौतों और भ्रष्टाचार को लेकर भी उन्होंने सरकार पर सवाल उठाए।
उन्होंने भाजपा पर पंजाब में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए ‘वारिस पंजाब दे’ नाम की पार्टी को कथित रूप से समर्थन देने का आरोप लगाया। यह आरोप पार्टी नेता के राजनीतिक वक्तव्य के रूप में सामने आया।
केंद्रीय नेताओं ने संघर्ष के इतिहास का किया उल्लेख
केंद्रीय सचिवालय सदस्यों के.एन. उमेश और बिक्रम सिंह ने कहा कि कम्युनिस्ट आंदोलन का सड़क से संसद तक संघर्ष करने का लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी मेहनतकश वर्ग के मुद्दों को लेकर अपना संघर्ष जारी रखेगी।
कन्वेंशन में विभिन्न प्रस्ताव पारित कर होशियारपुर जिले के बाड़ियां कलां सहित अन्य स्थानों पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं की कथित बेअदबी के मामलों में कार्रवाई की मांग की गई। इसके अलावा पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के पाठ्यक्रम में सिख इतिहास से संबंधित पाठ्यक्रम को दोबारा शामिल करने की मांग भी उठाई गई।
कन्वेंशन में पार्टी के प्रदेश सचिवालय और प्रदेश कमेटी के कई सदस्य तथा पंजाबभर से आए प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी प्रतिनिधियों ने प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया।
