हिमाचल प्रदेश विधानसभा : संस्थान खोलने और बंद करने पर सत्ता पक्ष-विपक्ष आमने-सामने -जरूरत और मांग के हिसाब से प्रदेश सरकार नए संस्थान खोलेगी : उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री

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रोहित जसवाल। शिमला : हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को एक बार फिर मौजूदा कांग्रेस सरकार द्वारा सैंकड़ों संस्थान बंद करने का मामला जोर शोर से गूंजा और विपक्ष ने इस पर खूब होहल्ला भी किया।
विपक्ष के हंगामे और सवालों के बीच उपमुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश सरकार जरूरत और मांग के हिसाब से नए संस्थान खोलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई विपक्षीय सदस्य ऐसे बंद संस्थानों के दस्तावेज उपलब्ध करवाता है जिनके लिए बजट और पद पूर्व सरकार द्वारा स्वीकृत कर दिए गए थे तो सरकार ऐसे संस्थानों को फिर से खोलने पर विचार करेगी।
उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार पूरी तरह से स्थिर, स्थाई और टिकाउ है। उन्होंने कहा कि जहां संस्थानों की जरूरत होगी वहां सरकार संस्थान खोलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व जयराम सरकार ने सत्ता में वापस आने के लिए आखिरी 6 महीने में संस्थान खोले, लेकिन फिर भी भाजपा को जनता ने सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने एक हजार ऐसे संस्थान खोले जिनके लिए न तो बजट था और न ही कोई पद स्वीकृत किए गए थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार पूरे विवेक के साथ सोच समझकर संस्थान खोल रही है।
विधायक रणधीर शर्मा के मूल सवाल के जवाब में मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र में जल शक्ति का एक-एक डिवीजन खोला जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा और ग्रामीण विकास विभाग में सरकार संस्थानों का युक्तिकरण कर रही है और जहां पर इनकी जरूरत होगी वहां सरकार पूरे दम के साथ संस्थान खोलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य के हित में जहां भी संस्थान खोलने की जरूरत होगी वहां खोलेंगे लेकिन अंधे तरीके से संपदा को नहीं लुटाया जाएगा। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि ऐसा नहीं है कि पूर्व सरकार के खोले गए संस्थान बंद रखे जाएंगे, उनको सरकार खोल रही है मगर मेरिट व डी-मेरिट के आधार पर इनको खोला जा रहा है।
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान सरकार ने सत्ता में आने के तुरंत बाद पूर्व सरकार द्वारा खोले गए संस्थानों को राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से बंद किया। विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि 15 जनवरी 2024 तक सरकार ने मात्र 35 संस्थान खोले। विधायक सतपाल सत्ती, राकेश जम्वाल और डॉक्टर हंसराज ने भी इस मुद्दे पर प्रतिपूरक प्रश्न पूछे।
एफआरए के तहत हिमाचल में 3327 मामले मंजूर
हिमाचल प्रदेश में बीते तीन सालों में एफआरए के तहत 3327 मामले मंजूर किए गए हैं। इनमें से 637 मामले एफआरए की धारा3 1 के तहत और 2690 मामले धारा3 2 के तहत मंजूर किए गए हैं। यह बात राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने शुक्रवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विधायक आशीष बुटेल के एक सवाल के जवाब में कही। जगत सिंह नेगी ने कहा कि एफआरए एक्ट 2006 पूर्व यूपीए सरकार का एक क्रांतिकारी कानून है, लेकिन हिमाचल में इस कानून का अभी तक पूरी सदुपयोग नहीं हो पाया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार एफआर के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए अप्रैल महीने में पंचायती राज प्रतिनिधियों की एक राज्य स्तरीय वर्कशाॅप करने जा रही है।
उन्होंने कहा कि यह कानून बहुत अच्छा है और लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार लोगों के हित्त में इस कानून को लागू करेगी। जगत सिंह नेगी ने कहा कि भाजपा सरकारों ने हमेशा ही इस कानून को प्रदेश में ठंडे बस्ते में डाले रखा, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इसी संबंध में लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराणा राणा के प्रतिपूर्वक सवाल पर जगत सिंह नेगी ने कहा कि एफआरए के तहत 52 मामले स्वीकृत किए गए हैं।
दोषी ठेकेदारों पर लगेगा जुर्मानाः हर्षवर्धन चैहान
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चैहान ने कहा है कि यदि एसआईडीसी में काम करने में किसी ठेकेदार की कोताही पाई गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। हर्षवर्धन ने विधायक विपिन सिंह परमार के एक सवाल के जवाब में कहा कि गत दो वर्षों में एसआईडीसी द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों और बोर्डाें में 616 टैंडर आवंटित किए गए, इनमें से 242 का कार्य प्रगति पर है जबकि शेष 374 का कार्य पूरा कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि एसआईडीसी ने पारदर्शिता से काम किया है। उन्होंने कहा कि एसआईडीसी किसी भी ठेकेदार का पंजीकरण नहीं करता और लोक निर्माण विभाग व अन्य विभागों में पंजीकृत ठेकेदार ही एसआईडी में ठेकेदारी के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एसआईडीसी का अधिकांश कार्य उद्योग विभाग के है और यह कार्य बददी, बरोटीवाला, नालागढ़ में होते हैं।
केंद्र से उठेगा चंबा में पासपोर्ट सेवा केंद्र का मामलाः
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा है कि प्रदेश में इस समय 7 पासपोर्ट सेवा केंद्र काम कर रहे हैं। इनमें कागड़ा, पालमपुर, उना, मंडी शामिल है। एक पासपोर्ट केंद्र शिमला में भी कार्यरत है। शिमला स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट के अधीन यह सभी पासपोर्ट सेवा केंद्र काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ अरसा पहले तक चंबा में भी एक पासपोर्ट सेवा केंद्र था, लेकिन इसे कांगड़ा स्थानांतरित कर दिया गया था। उन्होंने का की प्रदेश सरकार चंबा में पासपोर्ट सेवा केंद्र खोलने का मामला केंद्र सरकार से उठाएगी।
विधायक केवल सिंह पठानिया के प्रश्न के जवाब में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के तहत ब्राइडल पाथ बनाने के लिए 36 लाख रुपए से अधिक की राशि मंजूर की गई थी, लेकिन यह राशि किन्ही कारणों से जारी नहीं की जा सकी। अब इस राशि को चालू वित्त वर्ष में जारी की जाने के लिए कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कांगड़ा को पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित कर रही है। इसके अलावा सरकार ने 2400 करोड़ रुपए का पर्यटन विकास का प्रोजेक्ट एडीबी से मंजूर करवाया है। यह प्रोजेक्ट मंजूर होने के बाद अब प्रदेश में पर्यटन विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं है। इसके अलावा विधायक इंद्रदत लखनपाल, विवेक शर्मा, सुखराम चैधरी, नीरज नैययर, रीना कश्यप, मोहन लाल ब्राक्टा, दीपराज, लोकेंद्र कुमार और अनुराधा राणा ने भी अपने-अपने सवाल पूछे।
सरकारी समारोहों में मुख्य अतिथि के मुद्दे पर कमेटी गठित करेगी सुक्खू सरकार
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा है कि प्रदेश सरकार राज्य, जिला तथा मेलों सहित अन्य महत्वपूर्ण समारोहों में किसे मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जा सकता है, को लेकर सरकार एक समिति गठित करेगी जो इस बारे में विस्तृत दिशा-निर्देश तय करेगी। अग्निहोत्री ने कहा कि समिति की रिपोर्ट को मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा ताकि मुख्य अतिथि के रूप में किसे आमंत्रित किया जा सकता है, इस पर कोई विवाद न रहे।अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में भी बैठक करेगी और इसमें विपक्ष के सदस्यों को भी बुलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये मामला भाषा संस्कृति विभाग से भी जुड़ा है, इसलिए विभाग भी अपने दिशा निर्देश जारी करेगा। अग्निहोत्री ने कहा कि जब वह विपक्ष में थे तो हरोली में प्रदेश के सबसे बड़े पुल के उद्घाटन में भी पूर्व सरकार ने पट्टिका में हरोली से हारे हुए उम्मीदवार का नाम लिख दिया था।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर स्पष्ट निर्देशों की जरूरत है ताकि विधायक संस्थान को मजबूत किया जा सके। उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में भी पूर्व सरकार के समय हारे हुए उम्मीदवार का नाम उद्घाटन पट्टिका पर लिखा गया। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने इसी मुद्दे पर कहा कि किसी भी विवाद से बचने के लिए दिशा-निर्देश तय करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को विधानसभा की प्रोटोकॉल समिति के समक्ष रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा विधायक संस्था की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है और दिशा निर्देश से यह सुनिश्चित होगा कि इस मुद्दे पर कोई विवाद न हो। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वह इस मामले पर व्यक्तिगत संज्ञान ले रहे हैं।
यह मुद्दा शुक्रवार को विधानसभा में शून्यकाल के दौरान सुंदरनगर विधायक राकेश जम्वाल ने उठाया। जम्वाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद पराजित विधायक जिला स्तरीय मेलों सहित महत्वपूर्ण समारोहों में मुख्य अतिथि बन रहे है। उन्होंने कहा कि बिलासपुर में एक जिला स्तरीय नलवाड़ी मेले में पराजित उम्मीदवार को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया।
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