रिटायर जस्टिस धर्मचंद करेंगे अध्यक्षता, छह महीने में देनी होगी रिपोर्ट; देहरा, नूरपुर, पालमपुर और सुंदरनगर को जिला बनाने की मांग फिर चर्चा में
शिमला। हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन और प्रशासनिक पुनर्गठन को लेकर सुक्खू सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश धर्मचंद की अध्यक्षता में चार सदस्यीय आयोग का गठन किया है। आयोग को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसके बाद सरकार रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर जिलों के गठन और प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव को लेकर निर्णय ले सकती है।
आयोग को प्रदेश में मौजूदा जिलों, उपमंडलों, तहसीलों और विकास खंडों की व्यवस्था की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है। उसे यह भी देखना होगा कि प्रशासनिक ढांचे में कहां बदलाव की जरूरत है और कम खर्च में व्यवस्था को कैसे अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। आयोग का गठन नए जिले बनाने की संभावनाओं के साथ-साथ मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
नूरपुर, देहरा और पालमपुर को जिला बनाने की मांग
हिमाचल प्रदेश में नए जिले बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। कांगड़ा जिले के नूरपुर, देहरा और पालमपुर जैसे क्षेत्रों में जिला मुख्यालय से दूरी के कारण अलग जिला बनाने की मांग की जाती रही है। इन क्षेत्रों के लोगों का तर्क है कि अलग जिला बनने से प्रशासनिक कामकाज और सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है।
इसके अलावा शिमला जिले के रोहड़ू और रामपुर तथा मंडी जिले के सुंदरनगर को अलग जिला बनाने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है। वर्ष 2012 में तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी नए जिलों की संभावनाओं पर चर्चा हुई थी, लेकिन उस समय यह पहल आगे नहीं बढ़ सकी।
2022 के बाद अब 2027 के चुनाव से पहले फिर चर्चा तेज
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी नए जिलों का मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा में रहा था। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आयोग के गठन से इस विषय पर बहस दोबारा तेज हो गई है।
हालांकि, आयोग का गठन अपने आप में नए जिलों के निर्माण की घोषणा नहीं है। पहले आयोग को अपनी रिपोर्ट देनी होगी और उसके बाद सरकार को आगे का निर्णय लेना होगा। नए जिले बनाने से प्रशासनिक सुविधा के साथ-साथ कार्यालयों, कर्मचारियों, बुनियादी ढांचे और अन्य खर्चों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन भी जरूरी होगा।
देहरा को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज
कांगड़ा जिला प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। ऐसे में देहरा को अलग जिला बनाने की मांग को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी हो रही हैं। देहरा से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर विधायक हैं। राजनीतिक हलकों में इसे कांगड़ा क्षेत्र में समर्थन मजबूत करने की संभावित रणनीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
हालांकि, देहरा को जिला बनाने के पीछे सरकार का कोई चुनावी उद्देश्य होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आयोग का घोषित दायित्व प्रशासनिक सीमाओं और व्यवस्था की समीक्षा कर सरकार को सिफारिशें देना है।
कम खर्च में बेहतर प्रशासन पर भी होगा मंथन
आयोग केवल नए जिले बनाने की संभावनाओं तक सीमित नहीं रहेगा। उसे मौजूदा जिलों, उपमंडलों, तहसीलों और विकास खंडों की जरूरतों का आकलन कर यह बताना होगा कि प्रशासनिक ढांचे में कहां बदलाव जरूरी है। साथ ही, प्रस्तावित बदलावों से सरकारी खर्च कितना बढ़ सकता है और प्रशासनिक सेवाओं में कितना सुधार संभव है, इस पर भी विचार करना होगा।
आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि हिमाचल में नए जिलों के गठन को लेकर सरकार क्या कदम उठाती है। फिलहाल, छह महीने की समयसीमा के साथ आयोग का गठन होने से लंबे समय से चली आ रही मांगों पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।
