एएम नाथ। शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत शुक्रवार को ही राजनीतिक हंगामे के साथ हुई। सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर भाजपा और कांग्रेस विधायक आमने-सामने आ गए। विपक्ष ने राष्ट्रगान के बाद राष्ट्रगीत नहीं गाए जाने पर सवाल उठाते हुए विधानसभा अध्यक्ष से ‘वंदे मातरम’ गाने की अनुमति देने की मांग की।
मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के विधायक नारेबाजी करने लगे। लगातार बढ़ते शोर-शराबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी। खास बात यह रही कि मानसून सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही महज 12 मिनट ही चल सकी।
राष्ट्रगान के बाद ‘वंदे मातरम’ की मांग
सत्र के पहले दिन सदन की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई। इसके बाद भाजपा विधायकों ने राष्ट्रगीत नहीं गाए जाने पर आपत्ति जताई। विपक्ष का कहना था कि केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय गीत को लेकर नई व्यवस्था की गई है और विधानसभा में भी इसका पालन किया जाना चाहिए।
भाजपा विधायकों ने सदन की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ से करने की मांग उठाई और विरोध में खड़े हो गए।
अध्यक्ष बोले- विधानसभा में अलग है परंपरा
विपक्ष के विरोध के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि सदन की शुरुआत में दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि और शोक प्रस्ताव की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके बाद विधानसभा की कार्यवाही नियमानुसार आगे बढ़ेगी।
अध्यक्ष के अनुसार, हिमाचल विधानसभा में सदन की शुरुआत राष्ट्रगान से करने की परंपरा रही है, जबकि राष्ट्रीय गीत का गायन सदन की कार्यवाही के समापन पर किया जाता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय गीत को लेकर जारी नया प्रावधान सरकारी कार्यक्रमों से संबंधित है और विधानसभा की कार्यवाही पर इसे सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
हालांकि, विपक्षी सदस्य अध्यक्ष के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और उनका विरोध जारी रहा।
नारेबाजी से गरमाया सदन
विपक्ष के लगातार विरोध के बाद सत्ता पक्ष के विधायक भी नारेबाजी में शामिल हो गए। देखते ही देखते सदन का माहौल पूरी तरह गरमा गया। दोनों पक्षों के विधायक एक-दूसरे के खिलाफ नारे लगाते रहे।
हंगामे के कारण सदन की सामान्य कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। अंततः विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को शनिवार सुबह 11 बजे तक स्थगित करने की घोषणा कर दी।
विधानसभा परिसर के बाहर भी प्रदर्शन
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद राजनीतिक टकराव विधानसभा परिसर के बाहर भी दिखाई दिया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और सत्ता पक्ष के विधायकों ने भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद भाजपा विधायकों ने भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रगीत के सम्मान का मुद्दा उठाया।
CM सुक्खू का भाजपा पर पलटवार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भाजपा के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्ष को प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने भाजपा की अंदरूनी राजनीति पर भी सवाल उठाए।
सुक्खू ने आरोप लगाया कि भाजपा के भीतर एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ चल रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी के अंदर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को पद से हटाने की कोशिशें चल रही हैं।
वंदे मातरम के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में जो निर्णय लिया गया है, पार्टी उसी के अनुरूप आगे बढ़ेगी।
भाजपा का आरोप- राष्ट्रगीत का किया गया अपमान
भाजपा विधायक विपिन परमार ने कांग्रेस सरकार पर राष्ट्रगीत का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रगीत को लेकर कानून बनाया गया है और देश में उसका पालन किया जा रहा है।
परमार के मुताबिक, सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद उन्होंने राष्ट्रगान के पश्चात राष्ट्रगीत गाने की मांग विधानसभा अध्यक्ष के सामने रखी थी, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि विधानसभा किसी राजनीतिक दल की बैठक नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है। भाजपा ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रगीत के सम्मान के मुद्दे पर पार्टी पीछे नहीं हटेगी।
पहले ही दिन सियासी टकराव तेज
मानसून सत्र के पहले दिन ‘वंदे मातरम’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। भाजपा इसे राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़कर सरकार पर निशाना साध रही है, जबकि मुख्यमंत्री सुक्खू विपक्ष के विरोध को भाजपा की अंदरूनी राजनीति से जोड़ रहे हैं।
अब शनिवार को सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर इस मुद्दे को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह देखना अहम होगा।
