एएम नाथ। सरकाघाट : सिया गुलेरिया की नृशंस हत्या की खबर जैसे ही फैली, पूरे गोपालपुर क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया। हर आंख नम है और लोगों के दिलों में इस जघन्य अपराध को लेकर गहरा आक्रोश है। सिया केवल एक साधारण छात्रा नहीं थी, बल्कि वह प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता का अनूठा संगम थी। छात्र राजनीति का उभरता चेहरा पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहने वाली सिया सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी बेबाक राय रखती थी। वह छात्र संगठन एसएफआई की गोपालपुर इकाई में उपाध्यक्ष के पद पर थी। सिया का परिवार मेहनत-मजदूरी कर अपनी बेटियों के बेहतर भविष्य के सपने बुन रहा था। उसके पिता, जोगिंद्र कुमार, घर से दूर बद्दी में ट्रक चलाकर पाई-पाई जोड़ रहे थे ताकि उनकी बेटियां पढ़-लिखकर ऊंचे मुकाम हासिल कर सकें। सिया की बड़ी बहन भी बद्दी में ही एक निजी नौकरी कर पिता का हाथ बंटा रही थी, जबकि छोटी बहन अभी अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर रही है। परिवार को उम्मीद थी कि सिया अपनी पढ़ाई पूरी कर उनके संघर्षों को कम करेगी, लेकिन एक सिरफिरे ने पूरे घर की उम्मीदें उजाड़ दीं।
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सबकी चहेती थी सिया
कॉलेज में सिया एक अत्यंत अनुशासित छात्रा थी। कोई भी प्रोजेक्ट हो या शैक्षणिक गतिविधि, वह उसे समय से पहले और पूरी रचनात्मकता के साथ पूरा करती थी। उसकी सहेलियां बताती हैं कि वह पूरे ग्रुप की जान थी। उसकी हंसी और मिलनसार स्वभाव ऐसा था कि वह अजनबियों को भी अपना बना लेती थी। आज उसी हंसी को हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया है।
