4 चेहरों से मिलेगी सुवेंदु अधिकारी को सीधी टक्कर : आसान नहीं सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने की राह

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पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी  पहली बार सत्ता में आने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऐसे में अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा इसी बात की है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री  कौन होगा?

विधानसभा चुनाव से पहले ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई बार इस बात पर जोर दिया था कि राज्य का मुख्यमंत्री कोई ‘बंगाली’ ही होगा। बीजेपी की इस रणनीति को टीएमसी (TMC) के उस नैरेटिव की काट माना गया, जिसमें वो लगातार बीजेपी को ‘बाहरी लोगों’ (बोहिरागोतो) की पार्टी बताती रही है। आइए जानते हैं कि बीजेपी में मुख्यमंत्री पद की रेस में कौन से 5 चेहरे सबसे आगे चल रहे हैं।

1. सुवेंदु अधिकारी: सबसे बड़े दावेदार और ममता के पुराने सिपहसालार

टीएमसी को दिया था बड़ा झटका: ममता बनर्जी के कभी सबसे खास रहे सुवेंदु अधिकारी सीएम पद की रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं। 2021 चुनाव से कुछ महीने पहले दिसंबर 2020 में उनका बीजेपी में शामिल होना टीएमसी प्रमुख के लिए एक बहुत बड़ा झटका था।

नंदीग्राम में किया था बड़ा उलटफेर: 2011 में भूमि अधिग्रहण विरोधी ‘नंदीग्राम आंदोलन’ ने टीएमसी को सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। इसी नंदीग्राम में सुवेंदु ने ममता को हराकर तहलका मचा दिया था। नंदीग्राम आंदोलन के दौरान सुवेंदु ही ममता के राइट-हैंड थे।

5 साल तक सदन में लड़ी लड़ाई: 2021 में बीजेपी 77 सीटों पर सिमट गई थी, लेकिन सुवेंदु ने नेता प्रतिपक्ष (LoP) के रूप में 5 साल तक सदन के अंदर मुख्यमंत्री और टीएमसी को कड़ी टक्कर दी।

पूरे राज्य के नेता बने: कांग्रेस की छात्र राजनीति (जब वामपंथी चरम पर थे) से शुरुआत करने वाले सुवेंदु 2021 की हार के बाद मजबूती से डटे रहे। चुनाव बाद हुई हिंसा के दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं का साथ दिया और वह सिर्फ पूर्वी मेदिनीपुर के नेता ना रहकर पूरे राज्य में बीजेपी का बड़ा चेहरा बनकर उभरे। हालांकि अधिकारी की राह आसान नहीं है। इन चार चेहरों से सीधी टक्कर मिलेगी।-

2. शमिक भट्टाचार्य: ‘अटल’ छवि वाले पुराने संघ कार्यकर्ता

शुरुआती दौर के साथी: शमिक एक पुराने आरएसएस (RSS) कार्यकर्ता हैं और उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की तरह पार्टी का ‘उदार चेहरा’ माना जाता है। वह बंगाल बीजेपी के साथ तब से हैं, जब राज्य की राजनीति में पार्टी का कोई खास वजूद नहीं था।

पहले निर्वाचित विधायक: शमिक बंगाल में बीजेपी के पहले निर्वाचित विधायक हैं। उन्होंने 2014 के उपचुनाव में बशीरहाट दक्षिण सीट से जीत हासिल की थी।

अगर बीजेपी राज्य में किसी ‘बंगाली भद्रलोक’ (शालीन/पढ़े-लिखे) चेहरे पर दांव लगाना चाहती है, तो शमिक उनके प्रमुख विकल्पों में से एक होंगे।

3. स्वप्न दासगुप्ता: केंद्रीय नेतृत्व के करीबी ‘भद्रलोक’ चेहरे

पूर्व पत्रकार स्वप्न दासगुप्ता 2021 विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल बीजेपी के रोजमर्रा के कामकाज में काफी सक्रिय रहे थे।

वह भी राज्य में पार्टी का एक ‘भद्रलोक’ चेहरा हैं और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के काफी करीब माने जाते हैं। हालांकि, उनके साथ एक बड़ा माइनस पॉइंट यह है कि उनके पास प्रशासनिक अनुभव की कमी है।

4. दिलीप घोष: 3 विधायकों से लेकर 18 सांसदों तक पार्टी को खड़ा करने वाले नेता

लोकप्रिय चेहरा: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष एक बेहद लोकप्रिय नेता हैं। 2016 में जब पार्टी के पास केवल 3 विधायक थे, तब से उन्होंने संगठन को स्थापित करने और बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

सबसे बेहतरीन प्रदर्शन: उन्हीं के नेतृत्व में बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 42 में से 18 सीटें जीती थीं, जो लोकसभा चुनाव में बंगाल के अंदर बीजेपी का अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है।

2021 और 2024 के चुनाव में हार के बाद वे पार्टी से थोड़े दूर हो गए थे, लेकिन इस साल जनवरी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद उनकी दोबारा वापसी हुई है। वह अपनी खड़गपुर सदर सीट से जीत रहे हैं।

5. सुकांत मजूमदार: उत्तर बंगाल का मजबूत विकल्प

बीजेपी के एक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार फिलहाल नरेंद्र मोदी कैबिनेट में केंद्रीय मंत्री हैं।

उत्तर बंगाल में बीजेपी की पकड़ काफी मजबूत है। ऐसे में अगर पार्टी अपने इस मजबूत गढ़ से किसी नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपना चाहती है, तो सुकांत मजूमदार उनकी पहली पसंद हो सकते हैं।

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