बीबीएन, 4 अप्रैल (तारा) : बद्दी उपमडल के माजरू गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण कथा में कंस वध व रूकमणी विवाह का वर्णन किया।
व्यास पंडित प्रकाश चंद गर्गाचार्य ने श्री कृष्ण की ओर से कंस वध और श्री कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रेम और भक्ति की कथा सुनाई।
कंस ने कृष्ण और बलराम को मारने के लिए एक कुटिल चाल चली और उन्हें धनुष यज्ञ के बहाने मथुरा आमंत्रित किया। कंस का अंत मथुरा में प्रवेश करते ही कृष्ण ने कुवलयापीड़ हाथी और फिर कंस के पहलवानों- चाणूर और मुष्टिक का वध किया। अंत में, श्रीकृष्ण ने सिंहासन पर बैठे कंस को घसीटकर नीचे गिराया और उसकी छाती पर प्रहार करके उसका वध कर दिया। कंस के वध के बाद, श्रीकृष्ण ने अपने माता-पिता देवकी-वसुदेव को मुक्त कराया और उनके नाना उग्रसेन को पुनः मथुरा का राजा बनाया।
उसके बाद श्री कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रेम और भक्ति की कथा सुनाई।
रुक्मिणी विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री थीं। वह दिखने में बहुत ही सुंदर, बुद्धिमान और स्वभाव की सरल कन्या थीं। राजा भीष्मक के दरबार में जो कोई आता, वह भगवान श्रीकृष्ण के साहस और बुद्धिमता की तारीफ करता। रुक्मिणी बचपन से कई लोगों के मुख से कृष्ण की तारीफ सुनती आ रही थीं। इस कारण वह उन्हें चाहने लगी थीं। राजा भीष्मक ने अपने पुत्र रुक्म के कहने पर रुक्मिणी का विवाह चेदिराज शिशुपाल से तय कर लिया था। रुक्म शिशुपाल का खास मित्र था, इसलिए वह अपनी बहन का विवाह उससे कराना चाहता था। दूसरी ओर रुक्मिणी भले ही श्रीकृष्ण से कभी नहीं मिली थीं, लेकिन वह उन्हें दिल से चाहती थीं। इसलिए उन्हें यह रिश्ता पसंद नहीं आया। रुक्मिणी और शिशुपाल के विवाह की तारीख तय हो गई। रुक्मिणी के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं।
रुक्मिणी ने ठान लिया कि वह विवाह सिर्फ श्रीकृष्ण से करेंगी, नहीं तो अपने प्राण त्याग कर देंगी। उन्होंने अपनी एक सखी के माध्यम से श्रीकृष्ण को संदेश भिजवाया। रुक्मिणी ने संदेश में कहलवाया कि वह उनसे प्रेम करती हैं और उसका विवाह शिशुपाल से तय हो गया है। अगर उसकी शादी कृष्ण से नहीं होगी तो वह प्राण त्याग देंगी। जैसे ही कृष्ण के पास संदेश पहुंचा, वह चकित रह गए। द्वारिकाधीश ने भी रुक्मिणी की सुंदरता और बुद्धिमता के बारे में बहुत सुन रखा था।संदेश मिलते ही श्रीकृष्ण विदर्भ पहुंच गए। जब शिशुपाल विवाह के लिए द्वार पर आया तभी कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर लिया। जब रुक्मिणी के भाई रुक्म को पता चला तो वह अपने सैनिकों के साथ कृष्ण के पीछे गया। फिर श्रीकृष्ण और रुक्म के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें द्वारिकाधीश विजयी हुए। इसके बाद श्रीकृष्ण रुक्मिणी को लेकर द्वारिका आ गए और दोनों ने विवाह कर लिया।
मौके पर आयोजक मंडली की ओर से आकर्षक वेश-भूषा में श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत कर विवाह संस्कार की रस्मों को पूरा किया गया। कथा के साथ-साथ भजन संगीत भी प्रस्तुत किया गया।
