बारिश के बाद बहाली का काम तेज : हिमाचल प्रदेश में 152 सड़कें अभी भी बंद

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एएम नाथ । शिमला :  हिमाचल प्रदेश में भारी मानसूनी बारिश के बाद बुधवार को जरूरी सेवाओं की बहाली के काम में तेजी आई। अधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे सफाई अभियानों के चलते बंद सड़कों की संख्या घटकर 152 रह गई है।

राज्य आपदा अभियान केंद्र (SEOC) के अनुसार, 29 जुलाई को शाम 6 बजे तक राज्य भर में बंद सड़कों की संख्या 152 पर आ गई, जो एक दिन पहले 192 थी। फिलहाल कोई भी राष्ट्रीय राजमार्ग बंद नहीं है। मंडी जिला 58 बंद सड़कों के साथ सबसे बुरी तरह प्रभावित है। इसके बाद कुल्लू (31), चंबा (30), सिरमौर (14) और शिमला (14) का स्थान है।

बिजली-पानी की सप्लाई में भी सुधार :  दिन के दौरान बिजली आपूर्ति में भी काफी सुधार हुआ। बाधित डिस्ट्रिब्यूशन ट्रांसफार्मर रीजन (DTRs) की संख्या पहले की 189 से घटकर 72 हो गई। चंबा में 59, मंडी में 8 और सिरमौर में 5 डीटीआर प्रभावित हैं। पेयजल आपूर्ति की स्थिति में भी सुधार दिखा और बाधित जल आपूर्ति योजनाओं की संख्या 80 से घटकर 68 हो गई। हमीरपुर में सबसे ज्यादा 23 योजनाएं प्रभावित हैं, इसके बाद बिलासपुर (18), मंडी (16) और चंबा (15) हैं।

चंबा में बाढ़ और सड़क हादसा :  इस बीच, एसईओसी की 24 घंटे की घटना रिपोर्ट में पिछले 24 घंटों के दौरान चंबा जिले में तीन बड़ी घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें दो अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और एक सड़क दुर्घटना शामिल है।

पटवार सर्कल सुल्तानपुर के ओबेरी गांव और पटवार सर्कल हरिपुर के गेओटी गांव में अचानक आई बाढ़ से सुल्तानपुर में 28 घर, एक गौशाला और एक दुकान क्षतिग्रस्त हो गई। इस बाढ़ के कारण हरिपुर में एक सड़क भी बंद हो गई। बाढ़ की इन घटनाओं में किसी के घायल होने या मौत की कोई खबर नहीं है। एसईओसी की रिपोर्ट के अनुसार, डलहौजी तहसील के लहर में एक अलग सड़क दुर्घटना में पांच लोगों की जान चली गई।

मानसून में अब तक 15 लोगों की मौत : 30 जून से 29 जुलाई तक मानसून सीजन के कुल आंकड़ों से पता चलता है कि हिमाचल प्रदेश में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 15 लोगों की जान गई है। इनमें से 14 मौतें भूस्खलन के कारण हुईं, जिनमें लाहौल और स्पीति में 13 और चंबा में एक मौत शामिल है, जबकि कांगड़ा में अचानक आई बाढ़ में एक व्यक्ति की मौत हो गई। अब तक बादल फटने से किसी की मौत की सूचना नहीं है।

राज्य आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने कहा कि बहाली और सफाई का काम युद्ध स्तर पर जारी है। आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमें मानसून से जुड़ी किसी भी नई इमरजेंसी से निपटने के लिए चौबीसों घंटे अलर्ट पर हैं।

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