काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या 359 तक पहुंचने की खबर है, जबकि नदी के बहाव की दिशा में स्थित कई जिलों से अभी भी शव बरामद किए जा रहे हैं। इस प्राकृतिक आपदा के बाद 1,000 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी बताई जा रही है, जो ट्रेकिंग, गाइडेड टूर या धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे थे। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार 30 से अधिक देशों के नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर है। इसका कारण रिपोर्ट मिलने का अलग-अलग समय, आंकड़े जुटाने के तरीके और सत्यापन की प्रक्रिया में अंतर बताया जा रहा है।
भारत के 178 नागरिक लापता होने का आंकड़ा
उपलब्ध सूची के अनुसार भारत के 178 नागरिकों के लापता होने की जानकारी दर्ज है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के 35, ब्रिटेन के 33, कनाडा के 25, चीन के 24, अमेरिका के 65, मलेशिया के 51 और यूक्रेन के 53 नागरिकों के लापता होने की सूचना है।
अन्य देशों में नेपाल के 127, रूस के 8, जर्मनी के 8, सिंगापुर के 9, लातविया के 6, दक्षिण अफ्रीका के 6, जापान के 5, न्यूजीलैंड के 5, फ्रांस के 4, बेल्जियम के 3, स्पेन के 3 और पुर्तगाल के 3 नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा कई अन्य देशों के एक या दो नागरिकों के लापता होने की जानकारी भी सामने आई है।
उपलब्ध सूची में दर्ज कुल संख्या 667 है, जबकि व्यापक तौर पर लापता लोगों की संख्या इससे कहीं अधिक बताई जा रही है। आंकड़ों में अंतर के चलते स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद
नेपाल पुलिस के अनुसार सबसे अधिक शव दक्षिणी मैदानी क्षेत्र के चितवन जिले से बरामद किए गए हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट, धाडिंग और रसुवा से भी बड़ी संख्या में शव बरामद होने की जानकारी है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अब तक 359 शव बरामद किए जा चुके हैं। राहत और बचाव दल नदी के किनारे तथा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं।
800 से अधिक लोगों से संपर्क नहीं
नेपाल सरकार के अनुसार बाढ़ से रिहायशी इलाकों के साथ-साथ पनबिजली परियोजनाओं, कस्टम कार्यालयों और बिजली के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इसके कारण 800 से अधिक लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
निजी क्षेत्र के बिजली डेवलपर्स संगठन इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, नेपाल (IPPAN) ने भी विभिन्न पनबिजली परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के लापता होने की जानकारी दी है।
कई हाइड्रो प्रोजेक्ट के कर्मचारी भी लापता
216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1 पनबिजली परियोजना में काम करने वाली एंड्रिट्ज हाइड्रो कंपनी के 76 कर्मचारियों के लापता होने की जानकारी है। इनमें नेपाली और विदेशी नागरिक दोनों शामिल हैं। परियोजना डेवलपर नेपाल वॉटर एंड एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी के 11 कर्मचारी भी लापता बताए गए हैं। परियोजना में काम करने वाले आठ दक्षिण कोरियाई नागरिक भी लापता लोगों में शामिल हैं।
इसी तरह 111 मेगावाट की रसुवागढ़ी पनबिजली परियोजना में काम करने वाले 51 लोगों तथा 5 मेगावाट की मैलुंग खोला पनबिजली परियोजना के पावरहाउस में काम करने वाले आठ कर्मचारियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। 120 मेगावाट की रसुवा भोटेकोशी पनबिजली परियोजना में कार्यरत सिविल कॉन्ट्रैक्टर सिनोहाइड्रो के दो कर्मचारी भी लापता बताए गए हैं।
करीब 300 भारतीयों के लापता होने की खबर
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भी बाढ़ के बाद करीब 300 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी की पुष्टि की है। बताया गया है कि इनमें बड़ी संख्या उन भारतीय तीर्थयात्रियों की है, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए प्रभावित क्षेत्र से होकर गुजर रहे थे।
काठमांडू में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड अन्वीक्षा समिट में खनाल ने कहा कि रसुवा क्षेत्र में हुई त्रासदी के बाद बड़ी संख्या में लोगों का पता नहीं चल पाया है। उन्होंने कहा कि सरकार तबाही के व्यापक प्रभाव का आकलन करने के साथ-साथ लापता लोगों की तलाश और उनसे संपर्क स्थापित करने के प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि कुछ ही घंटों में कई शहरों में भारी तबाही हुई, हजारों परिवार प्रभावित हुए और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों के अनुसार राहत और बचाव अभियान के साथ प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन भी जारी है।
नोट: उपलब्ध आंकड़े अलग-अलग एजेंसियों और रिपोर्टों पर आधारित हैं। राहत एवं बचाव अभियान जारी होने के कारण मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव संभव है।
