कार्यभार संभालने की मूल तारीख से उच्च वेतनमान और एरियर देने के आदेश
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के लेक्चरर कैडर को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार की 8 मई 2025 की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसके तहत लेक्चरर (डायरेक्ट) से प्रधानाचार्य (स्कूल कैडर) का कार्यभार संभालने वाले शिक्षकों को पिछली अवधि का उच्च वेतनमान और वित्तीय लाभ नहीं दिया गया था।
न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को प्रधानाचार्य का कार्यभार संभालने की वास्तविक तारीख से उच्च वेतनमान दिया जाए। अदालत ने सभी बकाया एरियर और परिणामी वित्तीय लाभ का भुगतान 30 नवंबर तक करने के आदेश दिए हैं।
प्लेसमेंट के तर्क को अदालत ने किया खारिज
अदालत ने सरकार के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया कि शिक्षकों को प्रधानाचार्य का कार्यभार केवल ‘प्लेसमेंट’ के आधार पर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि प्लेसमेंट समान श्रेणी या पद के बीच होता है, जबकि यहां फीडर कैडर के कर्मचारियों से उच्च पद का कार्य लिया गया।
अदालत ने फंडामेंटल रूल 49 का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी कर्मचारी से उच्च पद के सभी कर्तव्यों का निर्वहन कराया जाता है तो उसे उस पद के वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए।
हेडमास्टर और लेक्चरर दोनों फीडर कैडर
खंडपीठ ने कहा कि हेडमास्टर और लेक्चरर दोनों प्रधानाचार्य पद के फीडर कैडर हैं। यदि एक कैडर को कार्यभार संभालने की तारीख से वित्तीय लाभ दिया जाता है तो दूसरे कैडर को इससे वंचित करना समानता के अधिकार के अनुरूप नहीं है।
यह मामला सुरेंद्र सिंह सहित अन्य नियमित लेक्चररों की याचिकाओं से जुड़ा था। वर्ष 2020 में नियमित पदोन्नति (DPC) के बजाय उन्हें प्लेसमेंट के आधार पर प्रधानाचार्य का कार्यभार सौंपा गया था। बाद में 8 मई 2025 को विभाग ने उन्हें नियमित प्रधानाचार्य बनाया, लेकिन वित्तीय लाभ नई तारीख से देने का निर्णय लिया। शिक्षकों ने इसी निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
