एएम नाथ। नई दिल्ली, 8 अक्तूबर: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के स्थानीय निकाय चुनावों से जुड़े एक मामले में 50 वार्डों के चुनाव रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया है। इनमें पटियाला जिले के 28 और मोगा जिले के 22 वार्ड शामिल हैं। अदालत ने नए चुनाव छह सप्ताह के भीतर कराने का निर्देश दिया है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय तथ्यान्वेषी आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया।
नामांकन प्रक्रिया में व्यापक बाधा का निष्कर्ष
आयोग का गठन सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च 2025 को किया था। आयोग ने 18 नवंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में नामांकन प्रक्रिया के दौरान व्यापक स्तर पर बाधा डाले जाने की बात कही गई थी। आयोग ने दस्तावेजों, वीडियो, CCTV फुटेज, तस्वीरों और संबंधित अधिकारियों व दावेदारों के बयानों की जांच की थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि कई मामलों में नामांकन पत्र छीने गए, फाड़े गए या नष्ट किए गए। इसके अलावा उम्मीदवारों पर हमला करने, उन्हें हिरासत में लेने या धमकाने के मामले भी सामने आए।
पटियाला और मोगा के ये वार्ड प्रभावित
अदालत के आदेश के तहत पटियाला नगर निगम के 28 वार्ड, मोगा जिले की बाघापुराना नगर परिषद के 15 वार्ड और धर्मकोट नगर परिषद के 7 वार्ड में नए सिरे से चुनाव होंगे। यानी मोगा जिले में कुल 22 वार्ड इस आदेश के दायरे में हैं।
दोबारा चुनाव की निगरानी भी होगी
सुप्रीम कोर्ट ने नए चुनावों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक निगरानी समिति गठित करने का निर्देश दिया है। समिति में हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को शामिल किया जाएगा। चुनाव प्रक्रिया की निगरानी न्यायिक स्तर पर की जाएगी।
पंजाब में संबंधित स्थानीय निकाय चुनाव 21 दिसंबर 2024 को हुए थे। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन 50 वार्डों में चुनाव प्रक्रिया नए सिरे से शुरू होगी।
