भाजपा नेता जय सिंह ने की लंबित मानदेय जारी करने की मांग, भूख हड़ताल की दी चेतावनी
वेतन न मिलने से परिवारों पर आर्थिक संकट, बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा असर
एएम नाथ। चंबा : वन मंडल चंबा के वन परिक्षेत्र मसरूंड के अंतर्गत मोहड़ी, मुघराट और माणी स्थित वन विभाग की नर्सरियों में कार्यरत नर्सरी वर्करों को पिछले तीन वर्षों से मानदेय नहीं मिल पाया है। लंबे समय से वेतन का भुगतान न होने के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अपनी मांग को लेकर नर्सरी वर्करों ने भाजपा कार्यसमिति सदस्य जय सिंह की अगुवाई में उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया और प्रशासन व वन विभाग के खिलाफ रोष जताया।
प्रदर्शन के दौरान नर्सरी वर्करों ने बताया कि वे पिछले लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें तीन वर्षों का मानदेय जारी नहीं किया गया है। कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष इस समस्या को उठाया गया और लंबित वेतन जारी करने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हो पाई है। इससे उनके सामने परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है।
वर्करों ने बताया कि नियमित आय न होने के कारण घर का खर्च चलाना भी चुनौती बन गया है। कई कर्मचारियों के बच्चे जिला से बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में उनकी फीस, रहने और खाने-पीने का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। आर्थिक तंगी के चलते कर्मचारियों को कर्ज लेने और अपनी दैनिक जरूरतों में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि नर्सरी वर्कर वन विभाग के महत्वपूर्ण कार्यों में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। पौधों का उत्पादन करने से लेकर उनके रोपण और देखभाल तक की जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाई जा रही है। इसके बावजूद समय पर मानदेय नहीं मिलने से कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि उनके पास आजीविका चलाने के लिए इस काम के अलावा कोई दूसरा साधन भी नहीं है।
नर्सरी वर्करों ने वन विभाग के उच्च अधिकारियों और जिला प्रशासन से मांग की है कि उनके पिछले तीन वर्षों का लंबित मानदेय जल्द से जल्द जारी किया जाए, ताकि वे अपने परिवारों की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांग पर गौर नहीं किया गया और वेतन का भुगतान नहीं हुआ तो वे भूख हड़ताल शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। कर्मचारियों ने कहा कि अब उनके सामने आंदोलन तेज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
