1.60 करोड़ से बनने वाले सरा गड़ाकुफर वन विश्राम गृह का मुख्यमंत्री ने किया वर्चुअल शिलान्यास : वन संरक्षण को रोजगार से जोड़ रही सरकार: मुख्यमंत्री सुक्खू

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एएम नाथ। शिमला।   मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज शिमला के ठियोग के सरा गड़ाकुफर में 1.60 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले वन विश्राम गृह का शिमला से वर्चुअली शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि सरा गड़ाकुफर में पर्यटन और ईको पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र की प्रकृति को निहारने के लिए हर वर्ष भारी संख्या में पर्यटक आते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में पर्यटन विकास की अपार संभावनाओं के बावजूद सरा गड़ाकुफर के लगभग 25 किलोमीटर के दायरे में कोई भी विश्राम गृह की सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में कई प्रसिद्ध मंदिर भी हैं, लेकिन श्रद्धालुओं के विश्राम व रात्रि ठहराव के लिए पर्याप्त सुविधा नहीं है, जिसे देखते हुए सरकार ने इस स्थान पर वन विश्राम गृह खोलने का निर्णय लिया है। इस विश्राम गृह के बनने से इस क्षेत्र में पर्यटन को पंख लगेंगे और स्थानीय एवं बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों को भी सुविधा प्राप्त होगी।
श्री सुक्खू ने कहा कि वन विभाग के पास इस समय प्रदेश में लगभग 450 विश्राम क्षेत्र हैं, जिन्हें सरकार की ईको-टूरिज्म पहल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पर्यटकों के लिए उपलब्ध करवाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए ईको-टूरिज्म साइटस को चयनित कर उनका आबंटन करने की प्रक्रिया चल रही है। अब तक 7 ईको-टूरिज्म साईट्स आवंटित की गई हैं। इसके अलावा 78 नई ईको-टूरिज्म साईट्स की आवंटन प्रक्रिया शीघ्र ही आरम्भ कर दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में इस योजना के तहत 600 हेक्टेयर बंजर चोटियों व पहाड़ियों पर पौध रोपण किया गया। इस कार्य में स्थानीय लोगों की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि रोपित पौधों के रख-रखाव की अवधि 7 वर्ष तय की गई है और इसमें स्थानीय लोगों का सहयोग लिया जा रहा है, जिससे उन्हें घर-द्वार पर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में 5000 हेक्टेयर वन भूमि पर पौधरोपण का लक्ष्य रखा है। इस दौरान 60 प्रतिशत फलदार पौधे और अन्य उपयोगी वृक्ष की प्रजातियों के पौधे रोपित किए जाएंगे, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और वन्य प्राणियों को वनों तक सीमित रखने में भी कामयाबी मिलेगी।
उन्होंने कहा कि बजट 2025-26 में राजीव गांधी वन संवर्धन योजना आरम्भ करने की घोषणा की है, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत युवक मंडलों, महिला मंडलों और स्वयं सहायता समूूहों द्वारा 1 से 5 हेक्टेयर की बंजर वन भूमि पर फलदार पौधे रोपित किए जाएंगे और 5 वर्षों तक उनका रख-रखाव भी करेंगे। इन मंडलों व समूहों को प्रथम वर्ष में पौधरोपण और बाढ़ लगाने के लिए 2.40 लाख रुपये की धनराशि दी जाएगी और हर वर्ष इनके रख-रखाव के लिए भी धनराशि प्रदान की जाएगी। इस प्रकार प्रत्येक मंडल और समूहों को पांच वर्षों में कुल 6.40 लाख रुपये पौधरोपण और उनके रख-रखाव के लिए दिए जाएंगे।
वहीं ठियोग में उपस्थित विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का इस वन विश्राम गृह के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए निरन्तर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि नारकण्डा में आइस स्केटिंग रिंक का निर्माण करने के लिए 3.50 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं, वहीं यूनिवर्सल कार्टन की शुरूआत पर सेब बागवानों के शोषण को रोका है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी सरकार के साथ खड़ी है और मिलकर हिमाचल प्रदेश को आगे ले जाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि भाजपा के षडयन्त्रों का मिलकर जबाव दिया जाएगा।
वहीं हिमाचल प्रदेश वन विकास निगम के उपाध्यक्ष केहर सिंह खाची ने विश्राम गृह के निर्माण को स्वीकृति प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश को-ऑपरेटिब बैंक के अध्यक्ष देवेन्द्र श्याम, अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा, पीसीसीएफ (हॉफ) समीर रसतोगी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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