केएपी सिन्हा को 5 नवंबर को हाईकोर्ट में होना था पेश; कर्मचारियों और पेंशनर्स के बकाया भुगतान का मामला जारी रहेगा
चंडीगढ़। पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लंबित महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) के भुगतान से जुड़े मामले में मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से शुरू की गई आपराधिक अवमानना की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले से जुड़ी अन्य कार्यवाही जारी रह सकती है।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने गुरुवार को यह आदेश दिया। हाईकोर्ट ने अपने पूर्व आदेश का पालन नहीं होने पर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट ने बकाया DA-DR भुगतान का दिया था आदेश
मामले की शुरुआत 3 अगस्त को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश से हुई थी, जिसमें पंजाब सरकार को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की सभी लंबित किस्तों का भुगतान करने के निर्देश दिए गए थे।
हाईकोर्ट ने कहा था कि कर्मचारियों और पेंशनर्स को DA का भुगतान पंजाब में तैनात IAS, IPS और IFS अधिकारियों के समान दरों पर किया जाए। राज्य सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को दो सप्ताह के भीतर बकाया राशि जारी करने के निर्देश भी दिए गए थे। अदालत ने देरी से भुगतान पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने की बात कही थी।
निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर कर्मचारियों और पेंशनर्स ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आदेश की अनदेखी का आरोप लगाया था।
मुख्य सचिव को व्यक्तिगत पेशी के निर्देश
हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर को मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को नोटिस जारी कर पूछा था कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। इसके बाद 13 अक्टूबर के आदेश में उन्हें 5 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए गए थे।
सरकार की ओर से जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। अदालत ने कहा था कि केवल सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने से हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। जब तक उच्च अदालत आदेश पर रोक नहीं लगाती या उसमें बदलाव नहीं करती, उसका पालन करना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों ने रखीं दलीलें
सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने दलील दी कि मुख्य सचिव के खिलाफ ऐसे मामले में आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की जा रही है, जिसका पहले ही निपटारा हो चुका है।
वहीं, याचिकाकर्ता मनजीत सिंह रंधावा की ओर से अधिवक्ता रवि शर्मा ने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव ने विभागों को पत्र भेजकर हाईकोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करने के निर्देश दिए थे।
सुनवाई के दौरान पीठ ने सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी के बीच मुख्य सचिव की ओर से विभागों को भेजा गया ऐसा निर्देश अपने आप में आपराधिक अवमानना माना जा सकता है। पीठ ने केवल विभागीय संवाद के आधार पर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ाने पर सवाल उठाए और मुख्य सचिव को जेल भेजने की जरूरत पर भी टिप्पणी की। इसके बाद अदालत ने अवमानना की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी।
