गढ़शंकर। शिरोमणि अकाली दल के सर्कल प्रधान जत्थेदार जगदेव सिंह मानसोवाल ने पंजाब सरकार से जल्दबाज़ी में पारित किए गए “जगत-जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट” से विवादित प्रावधान हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सिख पंथ की सर्वोच्च धार्मिक प्राधिकरण श्री अकाल तख्त साहिब ने कार्यकारी जत्थेदार कुलदीप सिंह गढ़गज के माध्यम से राज्य सरकार से आपत्तिजनक धाराएँ हटाने का अनुरोध किया था, लेकिन सरकार अब भी हठधर्मी और तानाशाही रवैया अपनाए हुए है।
जत्थेदार मानसोवाल ने एक्ट के कई पहलुओं की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सुखासन (श्री गुरु ग्रंथ साहिब के विश्राम स्थल) के स्थानों के लिए “स्टोर” शब्द का प्रयोग अनुचित और अपमानजनक है। उन्होंने संरक्षकों को नियंत्रित करने, प्रकाशित बीड़ों (सूचियों या स्मृति रजिस्टरों) को सार्वजनिक करने और धर्मग्रंथों को पहचान संख्या देने संबंधी प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई। उन्होनों ने कहा कि ऐसे कदम को पंथ स्वीकार नहीं कर सकता।
उन्होंने चेतावनी दी कि वास्तविक बेअदबी की घटनाओं को निशाना बनाने के बजाय, यह कानून श्री गुरु ग्रंथ साहिब के लिए इतने व्यापक सुरक्षा प्रावधान लागू करता है कि इससे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, ग्रंथियों और गुरुद्वारा समितियों को मानो कानूनी रूप से दोषी माना जा रहा हो। उन्होंने कहा, “धारा 983 जैसे व्यापक प्रावधान जोड़कर यह एक्ट गुरुद्वारा संस्थाओं और पदाधिकारियों को दंडात्मक कानूनी दायरे में ले आता है, जो सिख मर्यादा में प्रत्यक्ष सरकारी हस्तक्षेप के समान है।
जत्थेदार मानसोवाल ने कहा कि यह एक्ट पंथिक सलाह-मशविरा किए बिना जल्दबाज़ी में पारित किया गया, इसलिए इसे समुदाय की स्वीकृति प्राप्त नहीं है। उन्होंने पंजाब सरकार से तुरंत विवादित धाराएँ हटाने, श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों का पालन करने और सिख पंथ की भावनाओं का सम्मान करने की अपील की।
