चंडी मेहलोग, 20 जून (तारा) : वीएसएलएम कॉलेज ऑफ एजुकेशन चंडी में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर
डीएलएड व बीएड के प्रशिक्षुओं ने योगाभ्यास किया।
इस दौरान उन्होंने कॉलेज के एचओडी हीरा दत्त शर्मा ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की परंपरागत विरासत योग के महत्व को दर्शाता है परंतु हमें योग को मात्र एक दिन न मना कर केवल औपचारिकता नहीं निभानी है अपितु इसे अपने जीवन का अभिन्न अंग मानना चाहिए क्योंकि आज के इस भौतिकतावादी युग में व्यक्ति का शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य असंतुलित हो गया है । इसके लिए आवश्यकता है शरीर को हर्षिठ- पुष्ट एवं निरोग बनाए रखने के लिए योग शिक्षा की जो एक अमूल्य औषधि है ।उन्होंने कहा कि आज देश, समाज तथा व्यक्ति को औषधिविहीन व्यक्ति तथा अपराध विहीन समाज की आवश्यकता है ।इस संदर्भ में स्वामी विवेकानंद ने भी कहा था कि आज पुस्तकालयों की अपेक्षा खेल के मैदाने की आवश्यकता है । स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है ।
योग ही ऐसा सशक्त साधन है जो व्यक्ति को स्वस्थ बनाता है ।योग दर्शन के गुरु महर्षि पतंजलि को माना जाता है । योग के बारे में लोगों की अलग-अलग धारणाएं हैं ।इस समय कुछ लोग योग को कई प्रकार से संदेह की दृष्टि से देखतें हैं जबकि हमारे ऋषि मुनियों ने इसे बहुत अनुभव के बाद हमारे सामने रखा था। ऐसा प्रतीत होता है कि इस योग के अर्थ तथा मूल्य को वास्तव में हम भूल रहे हैं जो किसी समय भारतीयों के जीवन का एक अभिन्न अंग होता था। योग का अर्थ आत्मज्ञान द्वारा परमात्मा से मिलना है । बाकी जो संसार के मिलन है वह आध्यात्मिक नहीं अपितु सांसारिक है क्योंकि सांसारिक मिलन हमें अस्थाई एवं क्षणिक सुख ही प्रदान करता है । जो परम तत्वों के मिलन में साधन नहीं बन सकते इसलिए वह मार्ग तो सभी को आत्मज्ञान द्वारा ही पार करना होता है किंतु अंतिम लक्ष्य प्राप्ति के लिए शरीर को ठीक रखकर मन को एकाग्र करना चाहिए।
