जनता की सहूलियत से परखी जाएगी ई-गवर्नेंस की सफलता : सीएम सुक्खू

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धर्मशाला में राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन पर दिया जोर, व्यवस्था परिवर्तन से हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य

एएम नाथ। धर्मशाला, 16 अक्तूबर। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सुशासन किसी भी सरकार के प्रभावी संचालन की बुनियाद है। ई-गवर्नेंस की वास्तविक सफलता केवल तकनीक के इस्तेमाल या प्रशासनिक प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असली उद्देश्य आम नागरिकों का जीवन आसान बनाना है। विशेष रूप से दुर्गम और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सरकारी सेवाएं सरलता, पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध करवाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को धर्मशाला में प्रशासनिक सुधार एवं ई-गवर्नेंस पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में देशभर से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, नीति निर्माताओं और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने, सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप शासन प्रणाली विकसित करने पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक नौकरशाही व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित प्रशासन विकसित करने की जरूरत है। प्रशासनिक सुधारों का लाभ तभी सार्थक होगा, जब आम लोगों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें और उनकी समस्याओं का समाधान निर्धारित समय में हो सके। तकनीक का उपयोग इस तरह किया जाना चाहिए कि इससे सरकारी कामकाज में सरलता आए और जनता का प्रशासन पर विश्वास मजबूत हो।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने सत्ता संभालते ही व्यवस्था परिवर्तन को अपना प्रमुख लक्ष्य बनाया था। सरकार की कोशिश है कि प्रदेश के संसाधनों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और विकास योजनाओं का फायदा वास्तविक लाभार्थियों को मिले। हिमाचल प्रदेश को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने ई-गवर्नेंस को शासन व्यवस्था को जनहित के अनुरूप बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल औपचारिक प्रक्रिया बनकर नहीं रहना चाहिए। इसका लाभ प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक भी पहुंचना चाहिए, ताकि भौगोलिक कठिनाइयां सरकारी सेवाएं हासिल करने में बाधा न बनें।

उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और नीति निर्माताओं से नागरिकों की जरूरतों को केंद्र में रखकर कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुशासन की प्रभावशीलता का आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि सरकारी सेवाएं कितनी सुलभ हैं, प्रशासन कितना जवाबदेह है और आम जनता को योजनाओं का कितना लाभ मिल रहा है।

राष्ट्रीय सम्मेलन को प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल शासन के क्षेत्र में अनुभव साझा करने का मंच बताते हुए मुख्यमंत्री ने ऐसी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जो जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप हो और प्रदेश के समावेशी विकास में योगदान दे सके।

पहाड़ी राज्यों की जरूरतों के अनुरूप हो शासन व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने पहाड़ी राज्यों के हितों और उनकी विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सरकारी सेवाओं को प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचाना विशेष चुनौती है। ऐसे में ई-गवर्नेंस और प्रशासनिक सुधारों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप लागू करना महत्वपूर्ण है, ताकि दूरदराज के नागरिकों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पारदर्शी, जवाबदेह और जनहित पर आधारित प्रशासन ही व्यवस्था परिवर्तन के लक्ष्य को मजबूत कर सकता है।

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