ज्योति शर्मा बनी सरकारी स्कूलों का मान, सरकारी स्कूलों से शिक्षा ग्रहण कर पीएचडी करने बिना किसी खर्च के स्कॉलरशिप पर जा रही है अमेरिका

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गढ़शंकर: जहां लोग लाखों रुपए खर्च कर महंगे कानवैंट स्कूलों में बच्चों को पढ़ा कर उनके अच्छे भविष्य की इच्छा रखते हैं और कहीं ना कहीं सरकारी स्कूलों के प्रति उनकी दृष्टि अच्छी नहीं है। किंतु ज्योति शर्मा सरकारी स्कूलों के लिए मान बनी है और उसने सिद्ध कर दिया है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा किसी भी महंगे कान्वेंट स्कूल से कम नहीं है। तहसील गढ़शंकर के गांव चांदसू की लड़की ज्योति शर्मा पुत्री पुरुषोत्तम लाल सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल मजारा डींगरियां में छठी से 12वीं कक्षा तक पढ़ी। उसके बाद उसने बीएससी एग्रीकल्चर की डिग्री पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी लुधियाना से पास की और उसके बाद एमएससी ऐनटोमोलाॅजी भी पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी लुधियाना से ही पास की। उसने सन 2020 में पीईटी 2020 टैस्ट देकर पीएचडी एंटोंमोलॉजी में भाग लिया और पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी लुधियाना में पढ़ाई जारी रखी। अब उसका अमेरिका की लव स्टेट यूनिवर्सिटी चयन में हो गया है जहां उसे स्कॉलरशिप पर फुल फंडिंग में निशुल्क पढ़ाई कराई जाएगी। यूनिवर्सिटी द्वारा उसे खुद फोन पर निमंत्रण दिया गया है और उसका 7 वर्ष का वीजा जारी किया गया है। बात करते हुए ज्योति शर्मा ने बताया कि उसके पिताजी श्री पुरुषोत्तम लाल एक सामाजिक शिक्षा व अंग्रेजी के अध्यापक हैं और उनके स्कूल में छठी से दसवीं कक्षा तक पढ़ी है। अपनी इस प्राप्ति में अपने पिता के साथ साइंस अध्यापक श्री सतनाम सिंह, गणित अध्यापक नरेंद्र सिंह, मुल्ख राज, रजनी राणा, जसविंदर सिंह व प्रिंसिपल सुरजीत सिंह के योगदान का वर्णन करती है वहीं वह पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी लुधियाना के प्रोफेसर डॉ गौरव कुमार तग्गड़, डा. अनिल शर्मा, डॉ प्रदीप कुमार, डॉक्टर बेअंत सिंह का वर्णन करते अपने दिल से सम्मान करते हुए धन्यवाद करती है। वह बताती है कि सरकारी स्कूल किसी भी तरह से कॉन्वेंट स्कूल से पीछे नहीं है। यही कारण है कि वह अपनी प्रतिभा पर निशुल्क अमेरिका में पीएचडी की पढ़ाई करने के लिए जा रही है। उसने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ उसकी रुचि थियेटर, नाटक, खेल गतिविधियों व अन्य संस्कृतिक गतिविधियों में रही है। यह भी सरकारी स्कूलों के लिए सम्मान की बात है कि उसका भाई धर्मवीर सरकारी स्कूलों से ही पढ़ कर एग्रीकल्चरल डिवैलपमेंट ऑफिसर बन गया है।

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