उत्तर प्रदेश के अमरोहा में एक ही दूल्हे से तीन सगी बहनों ने शादी की ली। मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों के साथ सात फेरे लिए गए। दूल्हे ने बारी-बारी से दुल्हन की मांग भरी। खास बात यह रही कि तीनों बहनों की उम्र महज 18 से 20 साल के बीच है। दो बहनें सिर्फ 12वीं पास और एक बीटेक सेकंड ईयर की छात्रा है।
इस शादी ने पूरे जिले को देशभर में चर्चा का विषय बना दिया है। शादी के इस मौके पर न तो किसी के माता-पिता शरीक हुए, न ही कोई बैंड-बाजा बारात जैसा कोई तामझाम। 
कैसे हुई तीनों बहनों की शादी?
मामला धौरिया गांव का है। यहां की निवासी तीन सगी बहनों सरोज (20), सावित्री (19) और संतोष (18) ने श्यामपुरी गांव के विकास उर्फ विक्कू के साथ 17 जुलाई को शादी कर ली। चामुंडा माता मंदिर सात फेरे लिए। विकास ने बारी-बारी से तीनों बहनों की मांग में सिंदूर भरा। तीनों विकास के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
बताया जा रहा है कि शादी में दोनों परिवारों का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। पूरी शादी इन सभी ने गुप्त ढंग से की। बुधवार (22 जुलाई) शाम 5 बजे जब वीडियो सार्वजनिक हुआ, तब जाकर मामला सामने आया।
विकास से कैसे और कहां हुई मुलाकात?
तीनों बहनें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। वे इंस्टाग्राम और फेसबुक पर रील्स बनाती हैं। वर्तमान में उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर करीब 4.69 लाख फॉलोअर्स हैं, जबकि फेसबुक पर 84 हजार से ज्यादा हैं। मात्र 27 वीडियो अपलोड होने के बावजूद उनकी फैन फॉलोइंग अच्छी-खासी है। विकास पिछले 6 महीने से इन बहनों का कैमरामैन था। वह उनके वीडियो शूट करता था और कई बार स्क्रिप्ट में पति का रोल भी निभाता था।
आपको बता दें कि, सबसे बड़ी सरोज बीटेक सेकंड ईयर की छात्रा है। वहीं, सावित्री 12वीं पास है। सबसे छोटी, 18 साल की संतोष भी 12वीं पास है। इनके पिता रमेश किसान हैं। विकास ने इसी साल 12वीं पास की है और अब एलएलबी करने की तैयारी में है। वह तीन भाइयों में सबसे छोटा है। शादी के बाद वह तीनों बहनों के साथ ससुराल में रह रहा है।
तीनों बहनों ने बताया कि बचपन से वे साथ रही हैं। परिवार जब उनके रिश्ते अलग-अलग जगह तय करने लगा, तो उन्होंने फैसला किया कि वे अलग नहीं होंगी। एक ही व्यक्ति से शादी करके साथ रहेंगी। विकास ने उनकी इस भावना को समझा और तीनों को साथ रखने के लिए तैयार हो गया।
एक ही दूल्हे से शादी पर क्या बोले पंडित जी?
चामुंडा माता मंदिर के प्रबंधक डॉ. शिवचरण दास ने स्पष्ट किया कि शादी वाले समय मंदिर में सौंदर्यीकरण का काम चल रहा था। वहां कोई पुजारी मौजूद नहीं था। यानी शादी बिना किसी धार्मिक अधिकारी की उपस्थिति में हुई।
हसनपुर कोतवाली प्रभारी राजेश कुमार तिवारी ने बताया कि तीनों बहनों ने पुलिस को बताया है कि उन्होंने अपनी मर्जी से मंदिर में शादी की है। फिलहाल कोई लिखित शिकायत नहीं है, इसलिए कानूनी कार्रवाई की बात अभी नहीं उठी है।
क्या कहता है हिंदू विवाह अधिनियम 1955?
आपको बता दें कि, हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत एक ही वर से तीन वधू का विवाह प्रतिबंधित है। पुरुष के लिए एक से अधिक विवाह अवैध माना जाता है। हालांकि, इस मामले में तीनों बहनों ने एक साथ फेरे लिए, जिसे कानूनी रूप से अलग-अलग विवाह माना जा सकता है या नहीं, यह कानूनी विशेषज्ञों पर निर्भर करता है।
