दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी ने बनाए नए नियम – आबिद हुसैन सादिक

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रोहित भदसाली।  बिलासपुर, 27 नवंबर। उपायुक्त बिलासपुर आबिद हुसैन सादिक ने बताया कि भारत सरकार ने दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए दत्तक ग्रहण विनियम 2022 लागू किए हैं। इन नियमों के तहत, दंपति, एकल महिला या पुरुष जो बच्चा गोद लेना चाहते हैं, वे अब यह प्रक्रिया आसानी से पूरी कर सकते हैं। दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया की शुरुआत सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) की वेबसाइट cara.nic.in पर ऑनलाइन आवेदन से होती है। इसके अलावा, नजदीकी लोकमित्र केंद्र या जिला बाल संरक्षण इकाई में जाकर भी आवेदन किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो, विवाह प्रमाण पत्र, मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र और जन्म प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन जमा करने होंगे।
उपायुक्त ने आगे बताया कि कुछ दिनों पहले बरमाणा के गुगा मंदिर के पास एक बच्चा मिला था, जिसे गोद लेने के लिए समाज के कई लोग आगे आए। लेकिन, दत्तक ग्रहण अधिनियम और प्रक्रियाओं की सही जानकारी न होने के कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद, समाज में दत्तक ग्रहण अधिनियम और प्रक्रियाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं न हों और इच्छुक लोग दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा कर सकें।
भावी दत्तक माता-पिता शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक रूप से सक्षम होने चाहिए। उन्हें किसी गंभीर चिकित्सा समस्या का सामना नहीं करना चाहिए और उनके खिलाफ किसी आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने या बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन के आरोप नहीं होने चाहिए। विवाहित दंपति के लिए, दोनों पति-पत्नी की सहमति आवश्यक है। एकल महिला किसी भी लिंग के बच्चे को गोद ले सकती है, जबकि एकल पुरुष केवल बालक को गोद ले सकता है। स्थिर वैवाहिक संबंध न होने तक दत्तक ग्रहण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
दत्तक माता-पिता और बच्चे के बीच न्यूनतम आयु का अंतर 25 वर्ष होना चाहिए। दत्तक माता-पिता की पात्रता उनकी आयु और बच्चे की आयु के आधार पर तय की जाती है। हालांकि, रिश्तेदारों या सौतेले माता-पिता द्वारा गोद लेने के मामलों में यह आयु सीमा लागू नहीं होती। जिन दंपतियों के पहले से दो या अधिक बच्चे हैं, उन्हें केवल विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गोद लेने की अनुमति होगी। इसके अलावा, दत्तक माता-पिता को हर तीन साल में अपनी गृह अध्ययन रिपोर्ट को दोबारा सत्यापित कराना होगा। यदि तीन वर्षों के भीतर किसी को बच्चा गोद लेने का अवसर नहीं मिलता, तो उनकी वरिष्ठता उनके पंजीकरण की तिथि के आधार पर तय की जाएगी।
यह प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करने और बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए तैयार की गई है। इच्छुक अभिभावक अधिक जानकारी के लिए cara.nic.in पर विजिट कर सकते हैं या महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत जिला बाल संरक्षण इकाई से संपर्क कर सकते हैं।
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