विनोद तावड़े की टीम जुटा रही संभावित उम्मीदवारों का फीडबैक; 30-31 अक्टूबर की प्रस्तावित बैठक में संगठन और चुनावी रणनीति पर हो सकती है चर्चा
लखनऊ, 23 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी के सामने मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन का आकलन करने, संभावित उम्मीदवारों की पहचान करने और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय बनाने की चुनौती है। इसी बीच प्रदेश की करीब 125 विधानसभा सीटों पर सर्वे पूरा होने की चर्चा है। हालांकि, पार्टी ने न तो सर्वे के नतीजों की आधिकारिक सूची जारी की है और न ही किसी विधायक का टिकट काटने की घोषणा की है। <Cite refs={[“turn279173search0″,”turn279173search1”]}/>
125 सीटों पर सर्वे की चर्चा, उम्मीदवारों की स्वीकार्यता पर नजर
पार्टी से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े की टीम संभावित उम्मीदवारों और मौजूदा विधायकों को लेकर फीडबैक जुटा रही है। इसमें बूथ कमेटियों, शक्ति केंद्रों और स्थानीय नेताओं से मिलने वाली जानकारी के आधार पर उम्मीदवारों की लोकप्रियता, क्षेत्र में स्वीकार्यता और चुनावी प्रदर्शन की संभावनाओं का आकलन किए जाने की बात कही जा रही है।
इस कवायद में केवल विधायक की राजनीतिक पहचान ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में उसके कामकाज को लेकर लोगों की राय, कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और स्थानीय समीकरण भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जिन सीटों पर मौजूदा विधायक के प्रति नाराजगी की जानकारी सामने आती है, वहां नए चेहरे को मौका देने के विकल्प पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि, किन 125 सीटों पर सर्वे हुआ है और किन विधायकों की स्थिति कमजोर पाई गई है, इसका आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं हुआ है। इसलिए फिलहाल किसी खास विधायक का टिकट कटने की पुष्टि नहीं की जा सकती।
पूर्वांचल और अवध में संगठन की मजबूती पर जोर
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सीटें घटने के बाद पार्टी के सामने संगठन को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने की चुनौती है। ऐसे में पूर्वांचल और अवध सहित विभिन्न क्षेत्रों में संगठन की स्थिति, उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों का आकलन चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
सितंबर में विनोद तावड़े और भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष ने सांसदों, विधायकों, जिला पदाधिकारियों और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों के जरिए चुनावी तैयारियों पर चर्चा की थी। अब संभावित उम्मीदवारों और मौजूदा विधायकों को लेकर फीडबैक जुटाने की कवायद को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
30-31 अक्टूबर को लखनऊ में प्रस्तावित बैठक पर नजर
भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की 30 और 31 अक्टूबर को लखनऊ में प्रस्तावित बैठक को मिशन-2027 की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इसमें शामिल होने की संभावना जताई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और अन्य वरिष्ठ नेताओं के भी बैठक में शामिल होने की उम्मीद है। हालांकि, कार्यक्रम से जुड़ी अंतिम आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
बैठक में संगठन की जमीनी स्थिति, बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता, सरकार और संगठन के बीच समन्वय तथा आगामी चुनाव की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। पार्टी के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि स्थानीय स्तर पर सामने आ रही समस्याओं और कार्यकर्ताओं की शिकायतों को किस तरह दूर किया जाए।
मोदी, शाह और पार्टी नेतृत्व के कार्यक्रमों से बढ़ेगी राजनीतिक गतिविधियां
आगामी दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित कार्यक्रमों को भी चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी का 25 अक्टूबर को वाराणसी और नितिन नवीन का 27 अक्टूबर को आजमगढ़ जाने का कार्यक्रम बताया गया है, जबकि अमित शाह के 30-31 अक्टूबर को लखनऊ पहुंचने की संभावना है। इन कार्यक्रमों की अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक घोषणाओं से स्पष्ट होगी।
नवंबर से बूथ स्तर पर संवाद बढ़ाने की तैयारी?
भाजपा की चुनावी रणनीति में बूथ स्तर का संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चर्चा है कि नवंबर से बूथ अध्यक्षों, शक्ति केंद्र संयोजकों और अन्य पदाधिकारियों के साथ संवाद तेज किया जा सकता है। इसके जरिए संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन करने, कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनने और चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।
फिलहाल, 125 सीटों पर सर्वे पूरा होने की चर्चा और वरिष्ठ नेताओं के प्रस्तावित कार्यक्रम भाजपा की शुरुआती चुनावी तैयारियों की तस्वीर पेश करते हैं। लेकिन मौजूदा विधायकों के टिकट काटने, नए चेहरों को उतारने या सीटवार रणनीति तय करने पर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा। सर्वे के निष्कर्ष और संगठन से मिलने वाला फीडबैक इस फैसले में कितनी भूमिका निभाते हैं, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।
