एएम नाथ। शिमला, 6 अक्टूबर। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। वीरभद्र सिंह की धर्मपत्नी एवं पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के हालिया रोहड़ू दौरे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री की तस्वीर पोस्टरों में नहीं होने और मंच से उनका नाम नहीं लिए जाने पर नाराजगी जताई है। प्रतिभा सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह को गुजरे अभी साढ़े चार साल ही हुए हैं और इतनी जल्दी उन्हें भुला दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने हाल ही में रोहड़ू और रामपुर विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया था। रोहड़ू वीरभद्र सिंह की प्रमुख राजनीतिक कर्मभूमि रही है। वह 1990 से 2007 तक लगातार पांच बार रोहड़ू से विधायक रहे। ऐसे में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में उनकी तस्वीर और नाम नहीं होने को लेकर प्रतिभा सिंह की टिप्पणी ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
‘पोस्टर नहीं लगाया तो अपने लोग ही लगा देते’
प्रतिभा सिंह ने कहा कि यदि आयोजकों ने वीरभद्र सिंह की तस्वीर वाला पोस्टर नहीं लगाया तो कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ता और पदाधिकारी स्वयं उनके पोस्टर लगवा सकते थे। उन्होंने कहा कि मंच से भाषण के दौरान वीरभद्र सिंह के योगदान का उल्लेख किया जाना चाहिए था, ताकि नई पीढ़ी उनके काम और राजनीतिक योगदान से परिचित हो सके।
उन्होंने कहा कि जब वह सिरमौर जाती हैं तो किसी कार्यक्रम में हिमाचल के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार का नाम लिए बिना आगे नहीं बढ़तीं। उनके अनुसार, जिस तरह डॉ. परमार हिमाचल के लिए सम्मानित और आदरणीय हैं, उसी तरह वीरभद्र सिंह ने भी प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया और उन्हें याद रखना तथा उनकी विरासत के बारे में अगली पीढ़ी को बताना आवश्यक है।
रोहड़ू और रामपुर के पोस्टरों को लेकर उठे सवाल
प्रतिभा सिंह की आपत्ति ऐसे समय सामने आई है जब मुख्यमंत्री के रोहड़ू और रामपुर दौरों में लगाए गए पोस्टरों में वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं होने को लेकर राजनीतिक चर्चा शुरू हुई। भाजपा नेताओं ने भी इस मुद्दे को उठाया है। भाजपा नेता राजेंद्र राणा ने इसे कांग्रेस के भीतर राजनीतिक मतभेदों से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। हालांकि, पोस्टरों में तस्वीर नहीं होने के पीछे आयोजकों की ओर से कोई अलग कारण सार्वजनिक रूप से सामने आया है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
सुक्खू और वीरभद्र खेमे के बीच पुराने मतभेद फिर चर्चा में
हिमाचल कांग्रेस में सुखविंद्र सिंह सुक्खू और वीरभद्र सिंह के राजनीतिक खेमों के बीच मतभेदों की चर्चा पुरानी रही है। फरवरी 2024 में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी सरकार के कामकाज को लेकर नाराजगी जताते हुए मंत्री पद से इस्तीफे की घोषणा की थी। उस समय हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद संकट टला था।
हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम को सीधे तौर पर किसी नए राजनीतिक टकराव का संकेत मानने से पहले कांग्रेस संगठन और सरकार की ओर से इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार करना होगा।
छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह
वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे और करीब छह दशक के राजनीतिक जीवन में कांग्रेस के सबसे प्रमुख हिमाचली नेताओं में शामिल रहे। रोहड़ू से उनका लंबे समय तक राजनीतिक जुड़ाव रहा, जबकि रामपुर क्षेत्र से भी उनका पारिवारिक और राजनीतिक संबंध रहा। 2025 में रोहड़ू में उनकी प्रतिमा स्थापित किए जाने के दौरान भी उनके राजनीतिक योगदान और क्षेत्र से संबंध को प्रमुखता से याद किया गया था।
प्रतिभा सिंह के ताजा बयान ने यह सवाल फिर सामने ला दिया है कि कांग्रेस में वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत को मौजूदा संगठन और नेतृत्व किस तरह आगे बढ़ाता है। फिलहाल यह मामला बयानबाजी और राजनीतिक चर्चा तक सीमित है, लेकिन रोहड़ू जैसे वीरभद्र सिंह के पुराने राजनीतिक क्षेत्र में उठे सवालों ने प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी सियासत को जरूर चर्चा में ला दिया है।
