सड़क से संसद तक उग्र प्रदर्शन और लाठीचार्ज, देखते ही देखते कैसे हिंसक झड़प में बदला CJP का आंदोलन?

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नई दिल्ली : संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत हुई, लेकिन पहला ही दिन भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया. एक तरफ संसद के भीतर विपक्ष के तीखे विरोध के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी, तो दूसरी तरफ संसद परिसर के बाहर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव देखने को मिला।

हालात ऐसे बने कि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया.

नीट यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक के विरोध में बड़ी संख्या में छात्र और प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद मार्च के लिए निकले थे. सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें रोकने के लिए जगह-जगह बैरिकेड लगाए, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शनकारी संसद परिसर के बाहरी हिस्से तक पहुंच गए. स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि संसद के कुछ प्रवेश द्वारों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा. कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जबकि शाम तक सुरक्षा बलों ने हालात पर काबू पा लिया. जंतर-मंतर, जो दिनभर आंदोलन का केंद्र बना रहा, शाम होते-होते पूरी तरह खाली नजर आया और वहां सिर्फ सुरक्षा बल तैनात दिखाई दिए.

सीजेपी का उग्र प्रदर्शन  : सोशल मीडिया पर दिनभर कई वीडियो वायरल होते रहे. दावा किया गया कि राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर यात्रियों ने बंद किए गए एग्जिट गेट पार करने के लिए बैरिकेड फांद दिए. कई अन्य वीडियो में भीड़ को नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ते और सुरक्षा बलों को उन्हें रोकने की कोशिश करते देखा गया।

ली मेरिडियन होटल के पास रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने मोर्चा संभाला. शाम करीब 4:40 बजे भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की गई. संसद भवन के सामने भारी संख्या में छात्र प्रदर्शनकारी मौजूद थे, जबकि समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव भी सड़क पर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में नजर आईं. दिनभर की सबसे चर्चित तस्वीर वह रही, जिसमें डिंपल यादव जंतर-मंतर पर घायल प्रदर्शनकारियों का हालचाल लेती दिखाई दीं।

दोपहर करीब 3:30 बजे संसद भवन के सामने बारिश के बीच पुलिस प्रदर्शनकारियों को हटाने और हिरासत में लेने की कार्रवाई करती नजर आई. जंतर-मंतर पर आंसू गैस के गोले छोड़कर भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की गई. इस दौरान CJP के अभिजीत दिपके और 23 दिनों से भूख हड़ताल पर रहे सोनम वांगचुक की पत्नी भी ट्रक पर सवार होकर संसद मार्च में शामिल हुईं।

जनपथ चौराहे से संसद की ओर बढ़ती भीड़ के बीच संसद परिसर के भीतर भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी. संसद भवन के अंदर सुरक्षा बल हथियारों के साथ तैनात दिखाई दिए. सुबह 10 बजे शुरू हुआ संसद मार्च शाम तक जारी रहा. जनपथ लेन के पास छात्र और RAF आमने-सामने दिखाई दिए. प्रदर्शनकारी थाली-चम्मच बजाकर और “वी वॉन्ट जस्टिस” के नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे।

सीजेपी नेताओं से मिले केन्द्रीय मंत्री : प्रदर्शन का असर पूरे कनॉट प्लेस इलाके में दिखाई दिया. सड़कों पर जाम लग गया और वाहनों की आवाजाही लगभग ठप हो गई. एबीपी न्यूज से बातचीत में कई प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वे देश के अलग-अलग हिस्सों से आए हैं. कोई कनाडा से अपने भाई के समर्थन में पहुंचा था तो कोई कोटा से परीक्षा व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने आया था।

इसी बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और CJP के प्रतिनिधिमंडल के बीच अहम बैठक हुई. सुबह 11:50 बजे शुरू हुई यह बैठक करीब ढाई से तीन घंटे तक चली. बैठक के बाद शाम 4 बजे CJP की ओर से केंद्रीय मंत्री को लिखित ज्ञापन सौंपा गया. CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि मंत्री ने आश्वासन दिया है कि मुद्दे पर उचित स्तर पर चर्चा होगी, हालांकि कोई ठोस वादा नहीं किया गया. उन्होंने यह भी कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा।

एक ओर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत चल रही थी, वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस लगातार शांति बनाए रखने की अपील कर रही थी. जंतर-मंतर के गोलचक्कर पर प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए थे. पुलिस ने पहले उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं माने तो उन्हें बलपूर्वक हटाया गया. कई जगह बैरिकेड तोड़ने की कोशिश हुई, जिसके बाद लाठीचार्ज किया गया. इसके बावजूद कई प्रदर्शनकारी बैरिकेड फांदकर आगे बढ़ते दिखाई दिए। दिल्ली के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी प्रदर्शन हुआ. दिल्ली में डिंपल यादव को हिरासत में लिए जाने की खबर के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया, जहां पुलिस के साथ उनकी झड़प भी हुई।

नीट यूजी परीक्षा इस पूरे आंदोलन की मुख्य वजह बनी. 3 मई को आयोजित इस परीक्षा में लगभग 22 लाख छात्र शामिल हुए थे. पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा 12 मई को रद्द कर दी गई. इसके बाद 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा कराई गई, जिसमें करीब 20 लाख छात्र शामिल हुए, जबकि लगभग दो लाख अभ्यर्थियों ने री-एग्जाम नहीं दिया. इस पूरे विवाद ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

इसी मुद्दे को लेकर 20 जून से जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू हुआ था. 28 जून को सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक भी CJP की मांगों के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठ गए. धीरे-धीरे यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया और विपक्ष के कई नेता जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक का समर्थन करने लगे. 16 जुलाई को अरविंद केजरीवाल और 17 जुलाई को कांग्रेस नेताओं ने भी आंदोलन स्थल पर पहुंचकर समर्थन जताया।

प्रदर्शनकारियों से शांति की अपील :  18 जुलाई की सुबह दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया. पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत की गई. शुरुआत में वांगचुक की पत्नी ने अस्पताल ले जाने का विरोध किया और अनशन जारी रखने की मांग की, लेकिन बाद में उनकी सेहत को देखते हुए उन्होंने अपना रुख बदल दिया।

संसद सत्र शुरू होने के साथ ही दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जंतर-मंतर खाली कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन सोमवार को तस्वीर पूरी तरह बदल गई, जब प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर कूच कर गए. दिन के अंत में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया पर कहा कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पहली बार सरकार के साथ बातचीत का प्रस्ताव आया. उन्होंने बताया कि सौहार्दपूर्ण माहौल में पहले मौखिक चर्चा हुई और बाद में लिखित ज्ञापन सौंपा गया. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त कर सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन का सहयोग करने की अपील भी की। हालांकि, प्रदर्शनकारी अभी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू जरूर हो गया है, लेकिन सड़क और संसद के बीच जारी यह टकराव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा।

 

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