नई दिल्ली: खुद को हिमाचल प्रदेश में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (ADM) बताकर ससुर से करीब 39 लाख रुपये की कथित ठगी करने वाली महिला को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। हाई कोर्ट ने महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में अपराध का दायरा काफी बड़ा है और कथित साजिश की पूरी सचाई सामने लाने के लिए गहन जांच जरूरी है।
लिव-इन पार्टनर के साथ रहने लगी : सीमापुरी थाने में दर्ज FIR के मुताबिक, महिला ने अपने ससुर से अलग-अलग किश्तों में करीब 39 लाख रुपये लिए। आरोप है कि उसने परिवार को बताया कि उसका हिमाचल प्रदेश ADM के पद पर चयन हो गया है। और वह ट्रेनिंग कर रही है। इसी कहानी के आधार पर उसने पति से मिलने से इनकार किया और गुरुग्राम में अपने लिव-इन पार्टनर के साथ रहने लगी। पुलिस का आरोप है कि फर्जी कहानी को मजबूत करने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार के चीफ सेक्रेटरी के नाम से कथित नकली नियुक्ति अधिसूचना तैयार किया गया।
विश्वास दिलाने के लिए भेजा था ईमेल : अभियोजन के अनुसार, सह-आरोपी अनुपम कश्यप के जरिए ससुर को कई ईमेल भेजे गए। इनमें यह विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस आरोपी महिला से मिलना चाहते हैं। एक कथित फर्जी ईमेल में हाई कोर्ट के एक मौजूदा जज की पत्नी के गंभीर सड़क हादसे का दावा कर तस्वीर भी भेजी गई। बचाव पक्ष ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि महिला को फंसाया गया है और उसका मोबाइल फोन हैक हो गया था। यह भी दलील दी गई कि शिकायतकर्ता ने सरकारी नौकरी दिलाने के लिए पैसा दिया था। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों के बावजूद अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
