जगजीत सिंह डल्लेवाल का अनशन जारी रहेगा : किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट का निर्देश मानने से किया इनकार

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चंडीगढ़ : किसान संगठनों ने आमरण अनशन पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को लेकर दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को मानने से इनकार कर दिया है। किसान संगठनों ने साफ कहा कि डल्लेवाल को पंजाब सरकार के अस्थाई अस्पताल में दाखिल नहीं करवाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि खन्नौरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन के मंच पर ही किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का अनशन जारी रहेगा.
सुप्रीम कोर्ट के द्वारा आमरण अनशन पर बैठे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को लेकर दिए गए निर्देशों के बाद खन्नौरी बॉर्डर पर किसान नेताओं ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की.  किसान नेता लखविंदर औलख ने कहा कि जगजीत सिंह डल्लेवाल को अस्थाई अस्पताल में शिफ्ट नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में जो पंजाब के सरकारी डॉक्टरों ने रिपोर्ट दी है, वो पूरी तरह से गलत है.
अनशन तोड़ने से डल्लेवाल का इनकार :  किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि अगर सरकारी डॉक्टर और अधिकारी ये कह रहे हैं कि जगजीत सिंह डल्लेवाल की हालत ठीक है तो क्या वो गारंटी ले सकते हैं कि उनको कुछ नहीं होगा? उन्होंने कहा कि किसी कीमत पर जगजीत सिंह डल्लेवाल किसान आंदोलन की स्टेज और अनशन नहीं छोड़ेंगे, वो कुर्बानी की राह पर आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि हम 24 घंटे डल्लेवाल की पहरेदारी कर रहे हैं. डल्लेवाल भी यही चाहते हैं कि हर हालत में उनका अनशन जारी रहे।
25 दिनों से अनशन कर रहे हैं डल्लेवाल  :  बता दें कि पिछले 25 दिनों से जगजीत सिंह डल्लेवाल अनशन कर रहे हैं. उनके स्वास्थ्य को लेकर शुक्रवार की सुप्रीम कोर्ट में तीसरे दिन सुनवाई हुई। इसमें पंजाब सरकार ने उनके स्वास्थ्य को लेकर रिपोर्ट सौंपी थी. रिपोर्ट में उनके स्वास्थ्य को लेकर किए गए टेस्ट की रिपोर्ट भी जमा की गई।
इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डल्लेवाल को ऑफ साइट अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए. इसके साथ कोर्ट ने सवाल किया कि कौन सा अधिकारी जिम्मेदारी लेते हुए इस मामले में हलफनामा दायर करेगा। कोर्ट ने सुझाव दिया कि मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक इस मामले में हलफनामा जमा करें।  डल्लेवाल फसलों की खरीद को लेकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के बावत कानून बनाने की मांग को लेकर अनशन कर रहे हैं। दल्लेवाल ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट को एक पत्र भी लिखा था, जिसमें 6 मुद्दे उठाये गए थे और आरोप लगाया गया था कि केंद्र सरकार की ओर से 2020-21 में आंदोलन के दौरान सहमत मांगों को अभी तक पूरा नहीं किया गया है।
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