सुप्रीम कोर्ट के फैसले को प्रदेश के वित्तीय अधिकारों की जीत बताया; सालाना 500 से 1000 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त आय का दावा
एएम नाथ। शिमला, 6 नवंबर। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े एरियर और वित्तीय अधिकारों के मामले में हिमाचल प्रदेश को सर्वोच्च न्यायालय से मिली सफलता को ऐतिहासिक करार दिया है। उन्होंने इसे प्रदेश की जनता और हिमाचल के अधिकारों की जीत बताते हुए कहा कि अगले 20 वर्षों में राज्य को करीब 20 हजार करोड़ रुपये तक का आर्थिक लाभ मिलने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था के तहत हिमाचल प्रदेश को आगामी 20 वर्षों तक हर साल 60 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त होगी। इससे प्रदेश को लगभग 10 हजार करोड़ से 20 हजार करोड़ रुपये तक की आय होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर प्रयासों और प्रभावी कानूनी पैरवी से प्रदेश को उसका जायज हक दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है।
हर साल 500 से 1000 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त आय का अनुमान
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि इस फैसले से प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 1000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त आय प्राप्त होने का रास्ता खुला है। यदि बिजली की दर 13 से 14 रुपये प्रति यूनिट रहती है तो राज्य को अधिक लाभ मिलेगा। वहीं, छह रुपये प्रति यूनिट की दर पर भी प्रदेश को हर साल कम से कम 500 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त राजस्व से प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और विकास कार्यों को गति मिलेगी।
प्रदेश हितों से जुड़े मामलों में चौथी बड़ी सफलता
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के हितों से जुड़े मामलों में यह चौथी बड़ी सफलता है। इससे पहले वाइल्डफ्लावर हॉल, जेएसडब्ल्यू और किशाऊ बांध से संबंधित मामलों में हिमाचल के हितों की मजबूती से पैरवी की गई है। बीबीएमबी एरियर मामले में मिली सफलता सरकार की प्रदेश के अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि शानन पावर प्रोजेक्ट और वाटर सेस जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सरकार प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रख रही है। हिमाचल प्रदेश को उसके जायज अधिकार दिलाने के लिए आगे भी संघर्ष जारी रहेगा।
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर खर्च होगी राशि
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की लगभग 75 लाख जनता और 24 लाख परिवारों को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश के संसाधनों से जुड़े अधिकारों की प्राप्ति सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि अतिरिक्त राजस्व का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे के विकास, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और कर्मचारियों को समय पर वित्तीय लाभ उपलब्ध करवाने में किया जाएगा।
सुक्खू ने कहा कि प्रदेश की जनता ने उन्हें पांच वर्षों के लिए हिमाचल के संसाधनों और संपदा का संरक्षक बनाया है। वह पूरी निष्ठा और ईमानदारी से इस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना और राज्य के हितों की रक्षा करना है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि प्राकृतिक संसाधनों और प्रदेश के अधिकारों का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के निरंतर प्रयासों से हिमाचल प्रदेश वर्ष 2032 तक देश का सबसे समृद्ध और खुशहाल राज्य बनेगा।
