मैहला स्कूल के अतिरिक्त कमरों के लिए 2 करोड़ रुपये मंजूर, अगले सत्र से सीबीएसई संबद्धता की घोषणा
एएम नाथ। चम्बा, 6 नवंबर। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने चम्बा जिले के चार दिवसीय प्रवास के अंतिम दिन शुक्रवार को भरमौर विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने तीसा, भटियात और भरमौर विधानसभा क्षेत्रों में 656 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास किए।
मुख्यमंत्री ने मैहला ग्राम पंचायत में राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला और पीएम श्री राजकीय केंद्र प्राथमिक पाठशाला के विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनके भविष्य के लक्ष्यों और आकांक्षाओं के बारे में जानकारी ली।
छात्र राजनीति से मुख्यमंत्री बनने तक का सफर किया साझा
संवाद कार्यक्रम में 12वीं कक्षा के छात्र चाणक्य ने मुख्यमंत्री से राजनीति में आने की प्रेरणा के बारे में पूछा। इस पर मुख्यमंत्री ने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि विद्यार्थी जीवन से ही उनमें नेतृत्व की भावना थी और सरकारी नौकरी में उनकी विशेष रुचि नहीं थी।
उन्होंने कॉलेज में कक्षा प्रतिनिधि (सीआर) के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और छात्र संघ चुनाव जीतने के बाद राजनीति में आगे बढ़े। इसके बाद वे नगर निगम पार्षद बने और चार बार विधायक चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे।
चौथी कक्षा की एक छात्रा ने जब उनसे पूछा कि जीवन में उन्हें सबसे अधिक प्रेरणा किससे मिली, तो मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा, “मेरी माताजी मेरे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं।”
मैहला स्कूल के लिए 2 करोड़ रुपये की घोषणा
संवाद के दौरान दसवीं कक्षा की छात्रा सुहानी ने स्कूल में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए अतिरिक्त कमरों के निर्माण की मांग की। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की समस्या पर संज्ञान लेते हुए स्कूल में अतिरिक्त कमरों के निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपये मंजूर करने की घोषणा की।
इसके साथ ही उन्होंने मैहला स्कूल को आगामी शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई संबद्धता वाला स्कूल बनाने की घोषणा की। स्कूल के नए भवन के लिए जल्द भूमि आवंटित करने की बात भी कही।
विद्यार्थियों को मेहनत और अनुशासन का संदेश
मुख्यमंत्री ने दोनों स्कूलों के विद्यार्थियों के सवालों के जवाब देते हुए उन्हें जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी लगन, मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति बेहद जरूरी हैं।
विद्यार्थियों को इन गुणों को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।
