महाविद्यालय स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और नई पीढ़ी तक उसके हस्तांतरण का केन्द्र बनें
एएम नाथ। सलूणी : राजकीय महाविद्यालय सलूणी, चंबा में अखंड भारत संकल्प दिवस 2026 के अवसर पर विद्यार्थियों को राष्ट्र की एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत तथा राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मोहिंदर कुमार सलारिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि अखंड भारत का विचार केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक एकात्मता, विविधता में एकता, सामाजिक समरसता, संवाद, सेवा और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यनिष्ठा की भावना से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि अखंड भारत की शुरुआत किसी दूर के भूगोल से नहीं, बल्कि व्यक्ति के अपने विचार, व्यवहार और समाज से होती है।प्राचार्य ने “अखंड भारत का आधार—सात संकल्प” विषय पर बोलते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन, नदी-पर्वत एवं वनों की रक्षा, आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्य, सांस्कृतिक पुनर्जागरण एवं लोक-धरोहर संरक्षण, सेवा-सहकार एवं समाज-जागरण, युवा जागरण एवं नेतृत्व निर्माण तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं सुरक्षा को विद्यार्थी जीवन से जोड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण संरक्षण केवल शैक्षणिक विषय नहीं, बल्कि जीवन की आवश्यकता है। उन्होंने “एक विद्यार्थी—एक वृक्ष” का संकल्प लेने तथा जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, स्थानीय एवं औषधीय पौधों के संरक्षण और प्लास्टिक-मुक्त परिसर जैसी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन के महत्व पर भी विशेष बल दिया गया। भूस्खलन, बादल फटने, बाढ़, भूकंप एवं वनाग्नि जैसी हिमालयी आपदाओं को देखते हुए विद्यार्थियों को प्राथमिक उपचार, मूलभूत आपदा प्रतिक्रिया, अभ्यास एवं आपातकालीन तैयारी जैसे विषयों में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया।
प्राचार्य ने चंबा की समृद्ध लोक-संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण को भी विद्यार्थी दायित्व बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने गांव की लोककथा, लोकगीत, स्थानीय परंपरा अथवा लोक-धरोहर का दस्तावेजीकरण करने का आह्वान किया, ताकि महाविद्यालय स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और नई पीढ़ी तक उसके हस्तांतरण का केन्द्र बन सके।
युवा नेतृत्व के संदर्भ में उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल रोजगार प्राप्त करने वाले युवा नहीं, बल्कि समस्या समाधान करने वाले, नेतृत्व करने वाले, समाज को जोड़ने वाले और सेवा करने वाले युवा बनना चाहिए। खेल, योग, शारीरिक सुदृढ़ता, पर्वतारोहण, व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व प्रशिक्षण एवं सामुदायिक सेवा जैसी गतिविधियों को विद्यार्थी जीवन का हिस्सा बनाने पर बल दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के लिए सात-सूत्रीय विद्यार्थी संकल्प भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय पर्यावरणीय जिम्मेदारी, प्राथमिक उपचार एवं आपदा तैयारी, लोक-परंपराओं का दस्तावेजीकरण, सामुदायिक सेवा, नेतृत्व एवं व्यक्तित्व विकास तथा राष्ट्रीय एकता, अखंडता, सामाजिक सद्भाव एवं जिम्मेदार नागरिकता को शामिल किया गया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने भारत की एकता, अखंडता और सुरक्षा, हिमालय एवं पर्यावरण संरक्षण, भारतीय एवं हिमालयी संस्कृति के सम्मान, सामाजिक सद्भाव, सेवा, अनुशासन, चरित्र निर्माण तथा राष्ट्रहित में अपने ज्ञान एवं ऊर्जा के उपयोग का सामूहिक संकल्प लिया।
कार्यक्रम के समापन पर प्राचार्य डॉ. मोहिंदर कुमार सलारिया ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि “सात संकल्पों से जागृत विद्यार्थी, जागृत विद्यार्थियों से सशक्त समाज, सशक्त समाज से सुरक्षित हिमालय, सुरक्षित हिमालय से सशक्त भारत और सशक्त भारत से अखंड भारत की ओर” बढ़ने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल भारत के भविष्य की प्रतीक्षा नहीं करनी है, बल्कि अपने ज्ञान, चरित्र, सेवा और कर्म के माध्यम से भारत के भविष्य का निर्माण करना है।
इस कार्यक्रम में डॉ जय श्री, श्री दिनेश कुमार, डॉ सौरभ मिश्रा, श्री गुरदेव सिंह, श्री पंकज कुमार, श्री शुभम डोगरा आदि मौजूद रहे।
