पंचायतों में चरमराई व्यवस्था, युवा चरित्र प्रमाण पत्र के लिए भटकने को मजबूर
पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म होने के बाद व्यवस्था पूरी तरह से फ्लाप
एएम नाथ। चंबा : प्रदेश सरकार की गलत नीतियों के कारण आमजन काफी परेशान हो चुके हैं। एक तरफ पंचायत में पंचायत चुनाव को करवाने में प्रदेश सरकार पीछे हट रही है। वहीं दूसरी तरफ यहां वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की जा रही है। ऐसे में खासकर पंचायत में युवा वर्ग को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य जय सिंह ने कहा कि सरकार ने भले ही पंचायत सचिवों को प्रमाण पत्र, परिवार नकल, रिकॉर्ड संबंधी और अन्य सेवाओं में कार्य करने के आदेश दिए हैं। लेकिन धरातल पर ऐसा नहीं किया जा रहा है। पंचायत सचिव को कागजी औपचारिकता में उलझा कर रखा है। ऐसे में कई बार वह कार्यालय में ही मौजूद नहीं रहते हैं। पहले जहां पंचायत प्रतिनिधि चरित्र प्रमाण पत्र जारी करते थे लेकिन अब उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद व्यवस्था पूरी तरह से फ्लाप हो गई है। जिला चंबा में 300 से अधिक पंचायतें हैं जिनकी देखरेख का कार्य रामभरोसे चला हुआ है। जिसका खामियाजा आमजन को भुकतना पड़ रहा है। चरित्र प्रमाण पत्र के अलावा अन्य विकास संबंधी कार्य भी पूरी तरह से बंद हो गए हैं। ऑनलाइन हाजिरी हो या मनरेगा में अन्य प्रमाण पत्र जारी करने की बात हो या सत्ता में आने के बाद जनता के साथ किए गए बातों को भूलना कांग्रेस की पुरानी आदत है। जिसका खामियाजा आने वाले समय में उन्हें भुगतना पड़ेगा। चुनाव को आगे बढ़ाने के लिए कोर्ट से अर्जी लगाकर लोकतंत्र की हत्या करने का प्रयास कांग्रेस सरकार कर रही है। आपदा का बहाना देकर पंचायत चुनाव को टालना कांग्रेस सरकार को महंगा पड़ेगा। जनता की समस्या को लेकर कांग्रेस के कोई नेता आगे नहीं आ रहे हैं। बजट का रोना रो रही कांग्रेस इस बात का ध्यान रखे कि केंद्र ने 2026-27 का बजट आने वाले समय में विश्व में विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के साथ पेश किया है। जिसमें आधारभूत ढांचे, रक्षा आधुनिकीकरण,जन योजनाओं किसानों के प्रबल भविष्य, युवाओं और सेवा क्षेत्र पर अधिक से अधिक ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार खुद अपने धरातली कार्याें को पूरा करे।
