नई दिल्ली, 29 सितंबर। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने मंगलवार को चुनाव आयोग और मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस पर चुनावी हार का आत्ममंथन करने के बजाय चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। ईरानी ने यह भी पूछा कि हिमाचल प्रदेश, पंजाब, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में, जहां भाजपा सत्ता में नहीं है, कांग्रेस चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर क्या रुख अपनाती है। (The Times of India)
हार पर आत्ममंथन के बजाय चुनाव आयोग पर हमला : ईरानी
ईरानी ने कहा कि एक नागरिक के तौर पर वह मानती हैं कि चुनाव आयोग भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और चुनावी प्रक्रिया की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है। उनके मुताबिक, कांग्रेस इस बात से नाराज है कि उसे चुनावों में अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिल रहा और इसी कारण वह चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है।
उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम डुप्लीकेट है या किसी मृत व्यक्ति का नाम दर्ज है, तो ऐसे नामों को हटाने की प्रक्रिया पर कांग्रेस को आपत्ति क्यों है। ईरानी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नामों को लेकर चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठा रही है। ये आरोप वर्तमान SIR विवाद की राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं; कांग्रेस दूसरी ओर मतदाता सूची में बदलावों की पारदर्शिता और प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। (The Economic Times)
हिमाचल, पंजाब, केरल और कर्नाटक का मुद्दा उठाया
ईरानी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश, पंजाब, केरल और कर्नाटक में भाजपा सत्ता में नहीं है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व को स्पष्ट करना चाहिए कि इन राज्यों में चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर उसका क्या रुख है। उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस इन राज्यों में आयोग को लेकर संतुष्ट है या वहां भी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। (Navbharat Times)
लाहौर कांग्रेस अधिवेशन के उल्लेख पर भी निशाना
ईरानी ने कांग्रेस द्वारा लाहौर कांग्रेस अधिवेशन का संदर्भ दिए जाने पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी की स्थापना में ब्रिटिश अधिकारी ए.ओ. ह्यूम की महत्वपूर्ण भूमिका थी और कांग्रेस का पहला अधिवेशन 1885 में बंबई में हुआ था। भारत सरकार के आधिकारिक इतिहास संबंधी स्रोत भी कांग्रेस की स्थापना में सेवानिवृत्त ब्रिटिश अधिकारी ए.ओ. ह्यूम की भूमिका और 1885 में पहले अधिवेशन की पुष्टि करते हैं। (HCIMale)
हालांकि, कांग्रेस के इतिहास को केवल ब्रिटिश शासन की रक्षा के उद्देश्य से गठित संगठन के रूप में प्रस्तुत करना ईरानी का राजनीतिक आरोप/व्याख्या है। उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोत कांग्रेस की स्थापना में ह्यूम की भूमिका तो दर्ज करते हैं, लेकिन शुरुआती कांग्रेस के उद्देश्यों में भारतीयों के लिए राजनीतिक संवाद, प्रतिनिधित्व और सुधारों की मांग भी शामिल थी। (Parliament News)
ईरानी ने कहा कि जिस कांग्रेस पार्टी की स्थापना ब्रिटिश शासन के दौर में हुई, वही आज लाहौर कांग्रेस अधिवेशन का हवाला देकर चुनाव आयोग पर हमला कर रही है। उन्होंने इसे लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर तीखी टिप्पणी की।
चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक टकराव
स्मृति ईरानी की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब SIR और मतदाता सूची में बदलावों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची में हुए बदलावों पर सवाल उठाए हैं, जबकि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रियाओं को कानूनी नियमों के तहत संचालित किए जाने की बात कहता रहा है। इस विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से संबंधित याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति बनी है। (The Indian Express)
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