हर गांव तक पहुंच चुका नशा’, 5 सितंबर से आंदोलन का ऐलान; सरकारी नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र की मांग
रोहित जसवाल। ऊना। हरोली विधानसभा क्षेत्र में नशे के बढ़ते कारोबार और दो युवकों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा नेता प्रो. राम कुमार ने प्रदेश सरकार पर नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हरोली में चिट्टे का नेटवर्क लगातार फैल रहा है और इसका सबसे ज्यादा असर युवाओं तथा उनके परिवारों पर पड़ रहा है।
ऊना में पत्रकार वार्ता के दौरान प्रो. राम कुमार ने दावा किया कि हरोली विधानसभा क्षेत्र के लगभग हर गांव तक नशे की समस्या पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि कई परिवार अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं और नशे के कारण युवाओं का जीवन बर्बाद हो रहा है। उन्होंने हाल में दो युवकों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौतों का मुद्दा भी उठाया और नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
‘सिर्फ जागरूकता से नहीं रुकेगा नशा’
प्रो. राम कुमार ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा लंबे समय से चिट्टे और नशे के कारोबार के खिलाफ आवाज उठाती रही है, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि केवल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने से नशे का कारोबार खत्म नहीं होगा। इसके लिए तस्करों और उनके नेटवर्क पर सीधी एवं सख्त कार्रवाई जरूरी है।
उन्होंने उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि हरोली के लोगों में नशे को लेकर चिंता बढ़ रही है, लेकिन सरकार और क्षेत्रीय नेतृत्व की ओर से अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही।
5 सितंबर से हरोली में विरोध प्रदर्शन
भाजपा नेता ने घोषणा की कि 5 सितंबर से हरोली क्षेत्र में नशे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य सरकार और प्रशासन का ध्यान क्षेत्र में बढ़ती नशे की समस्या की ओर खींचना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रदेश में चिट्टा माफिया दोबारा सक्रिय हुआ है। साथ ही सरकार से मांग की कि पुलिस को बिना राजनीतिक दबाव के कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी जाए और नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
सरकारी नशा निवारण केंद्र बनाने की मांग
प्रो. राम कुमार ने हरोली में सरकारी नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं को केवल अपराधी के तौर पर देखने के बजाय उनके उपचार और पुनर्वास पर भी ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि नशे से प्रभावित परिवारों को अपने ही क्षेत्र में इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास की बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि तस्करी रोकने के साथ-साथ नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।
