एएम नाथ। शिमला / गाजियाबाद। नशे के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले कोडीनयुक्त कफ सीरप की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सोमवार रात सीमापुरी स्थित कसाना क्रेन कंपाउंड के एक गोदाम में छापेमारी की। इस दौरान करीब 50 हजार बोतलें बरामद की गईं, जिनकी कीमत लगभग 85.80 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने वैध दस्तावेज पेश नहीं कर पाने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
गोदाम में छिपाकर रखी गई थीं हजारों बोतलें
पुलिस के अनुसार, मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर टीम ने गोदाम में छापा मारा। तलाशी के दौरान कोडीनयुक्त कफ सीरप की बड़ी खेप मिली। मौके पर मौजूद वीरेंद्र सिंह, शिव शंकर कुमार और राजेश कुमार तिवारी से सीरप के संबंध में दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वे वैध कागजात पेश नहीं कर सके। इसके बाद तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
हिमाचल से बिहार भेजने की थी योजना
सहायक पुलिस आयुक्त अमित सक्सेना के मुताबिक, सीरप दिल्ली की जेवरन हेल्थ केयर कंपनी के नाम पर खरीदा गया था। खेप को हिमाचल प्रदेश से गाजियाबाद लाया गया था और यहां से बिहार भेजने की तैयारी थी। पुलिस को इस प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़े के संकेत मिले हैं।
जांच में सामने आए विवरण के अनुसार, माल की बिक्री जेवरन हेल्थ केयर से नूतन फार्मा कंपनी को दिखाकर इसे पटना भेजने की योजना बनाई गई थी। पुलिस अब इस पूरे लेन-देन और दस्तावेजों की जांच कर रही है। मामले में जेवरन कंपनी के मालिक पुरोहित गुप्ता उर्फ भोला की तलाश भी की जा रही है।
फर्जी कंपनियों के जरिए तस्करी का संदेह
पुलिस का कहना है कि जांच में जेवरन हेल्थ केयर और संध्या ट्रांसपोर्ट कंपनी की गतिविधियां भी सामने आई हैं। अधिकारियों के अनुसार, जेवरन कंपनी पिछले दो वर्षों से कथित तौर पर केवल बिहार में सीरप बेच रही थी, जबकि संध्या ट्रांसपोर्ट भी कोडीनयुक्त सीरप के परिवहन से जुड़ी बताई जा रही है। पुलिस को संदेह है कि कंपनियों का इस्तेमाल सीरप की अवैध सप्लाई के लिए किया जा रहा था।
कई गुना कीमत पर बेचने का दावा
सहायक पुलिस आयुक्त के अनुसार, तस्करी के जरिए पहुंचाया जाने वाला सीरप नशे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पुलिस का दावा है कि इसकी बिक्री एमआरपी से दो से तीन गुना अधिक कीमत पर होती है, जबकि बांग्लादेश में इसकी कीमत पांच गुना तक पहुंच सकती है।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच का उद्देश्य सीरप की खरीद, परिवहन और सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाना है।
