नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक मर्यादा और सदन की सर्वोच्चता को बनाए रखने के लिए किसी भी स्तर का समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने संकेत दिया कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो गुरु तेग बहादुर जी से जुड़ी टिप्पणियों और उससे उत्पन्न विशेषाधिकार हनन के मामले पर निर्णायक कार्रवाई के लिए विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है.
अपने निवास पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि “मामले की गंभीरता, दिल्ली विधान सभा की गरिमा तथा लोकतांत्रिक जवाबदेही को बनाए रखने की आवश्यकता को देखते हुए, सदन का विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है, क्योंकि इस विषय में सभी निर्णय केवल सदन द्वारा ही लिए जाने चाहिए कहीं और नहीं,” गुप्ता ने आगे कहा कि दिल्ली विधान सभा सचिवालय द्वारा पंजाब फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के डायरेक्टर को औपचारिक नोटिस जारी किया गया है, जिसमें रिपोर्ट के आधार सहित विस्तृत उत्तर मांगा गया है. इसके लिए उन्हें 22 जनवरी तक का समय दिया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली विधानसभा सदन इस मामले की विधि प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देगा।
गुरु तेग बहादुर जी के सम्मान का प्रश्न
अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने गंभीर स्वर में कहा कि यह मामला सिख गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर के प्रति की गई टिप्पणियों से संबंधित है, जिनका सर्वोच्च बलिदान भारत की सभ्यता और नैतिक मूल्यों का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि गुरुओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना भारत की संस्कृति का हिस्सा है, और जो लोग इसमें संवेदनशीलता नहीं दिखाते, वे सार्वजनिक उत्तरदायित्व के योग्य नहीं हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही जनता की आवाज हैं और उनकी जिम्मेदारी जनभावनाओं का सम्मान करना है।
पंजाब पुलिस और FSL को नोटिस
सदन की जांच प्रक्रिया को तेज करते हुए दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने निदेशक, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, पंजाब को औपचारिक नोटिस जारी कर 22 जनवरी तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. अध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में कहा कि वैज्ञानिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप या तथ्यों के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसके अतिरिक्त विधानसभा सचिव ने डीजीपी पंजाब और पुलिस कमिश्नर, जालंधर इन अधिकारियों ने जवाब देने के लिए समय मांगा था, जिन्हें अब 22 जनवरी 2026 तक की मोहलत दी गई है. विशेष डीजीपी (साइबर अपराध), पंजाब के लिखित जवाब की वर्तमान में सूक्ष्म जांच की जा रही है. अध्यक्ष के अनुसार, स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से भी पेश होने के लिए कहा जा सकता है।
पंजाब पुलिस और FSL को नोटिस
सदन की जांच प्रक्रिया को तेज करते हुए दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने निदेशक, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, पंजाब को औपचारिक नोटिस जारी कर 22 जनवरी तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. अध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में कहा कि वैज्ञानिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप या तथ्यों के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसके अतिरिक्त विधानसभा सचिव ने डीजीपी पंजाब और पुलिस कमिश्नर, जालंधर इन अधिकारियों ने जवाब देने के लिए समय मांगा था, जिन्हें अब 22 जनवरी 2026 तक की मोहलत दी गई है. विशेष डीजीपी (साइबर अपराध), पंजाब के लिखित जवाब की वर्तमान में सूक्ष्म जांच की जा रही है. अध्यक्ष के अनुसार, स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से भी पेश होने के लिए कहा जा सकता है।
संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा का संकल्प
विजेंद्र गुप्ता ने दोहराया कि दिल्ली विधानसभा अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा, “सत्य रिकॉर्ड पर है और संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से ही जवाबदेही तय की जाएगी.” उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी बाहरी हस्तक्षेप या जांच में बाधा डालने के प्रयासों को विफल कर दिया जाएगा. विधानसभा अध्यक्ष का यह कड़ा रुख संकेत देता है कि आने वाले दिनों में दिल्ली की राजनीति और सदन की कार्यवाही में बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।