सिख विरोधी दंगे 1984: कांग्रेस नेता सज्जन कुमार सिख दंगा मामले में दोषी करार

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दिल्ली की विशेष अदालत ने वर्ष 1984 में सिख विरोधी दंगे में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी करार दिया. राउज एवेन्यू की विशेष अदालत ने पिता और पुत्र की हत्या के मामले में सज्जन कुमार को दोषी ठहराया।
विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए सजा पर बहस के लिए 18 फरवरी की तारीख तय की. यह मामला सरस्वती विहार में पिता-बेटे की हत्या से जुड़ा हुआ है. आरोप है कि सज्जन कुमार ने भीड़ को हत्या के लिए उकसाने का काम किया. फिलहाल कुमार उम्रकैद की सजा काट रहे हैं. कुमार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302(हत्या), 147(दंगा भड़काने), 148(खतरनाक हथियार के साथ दंगा में शामिल होने), 149(अवैध तरीके से जमा होने होने) के सहित कई धाराओं में सजा सुनाई गयी है.
इस मामले में आरोपी की शिकायत पर 9 सितंबर 1985 को सज्जन कुमार और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी. लेकिन गवाह के अभाव में मामला आगे नहीं बढ़ सका. वर्ष 2015 में केंद्र की मोदी सरकार ने सिख दंगों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया और शिकायतकर्ता ने 23 सितंबर 2016 को सज्जन कुमार के खिलाफ बयान दर्ज कराया.
कांग्रेस के लिए पंजाब में हो सकती है मुश्किल
दिल्ली में हुए सिख दंगा कांग्रेस के लिए पहले भी मुसीबत का सबब रहा है. इस मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी करार दिए जाने के बाद कांग्रेस के लिए आने वाले समय में पंजाब में मुश्किल खड़ी हो सकती है. भाजपा और अन्य विपक्षी दल आरोप लगाते रहे हैं कि सिख दंगों में कांग्रेस नेताओं की भूमिका रही है. सिख दंगे के बाद हालांकि पंजाब में कांग्रेस कई बार सरकार बना चुकी है. लेकिन कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी करार दिए जाने के बाद सिख दंगों को लेकर एक बार फिर पार्टी पर सवाल उठेंगे. भाजपा सिख दंगों को लेकर हमेशा कांग्रेस को निशाना बनाती रही है. ऐसे में सज्जन कुमार को दोषी करार देने के बाद भाजपा एक बार फिर कांग्रेस के खिलाफ आक्रामक रूख अपना सकती है और इसका पंजाब की राजनीति पर असर पड़ सकता है.
पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को दोषी करार दिए जाने पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के महासचिव जगदीप सिंह कहलों ने कहा कि 40 साल पहले सिख कत्लेआम का नेतृत्व करने वाले सज्जन कुमार को दोषी करार देने पर पर अदालत का आभार व्यक्त करता हूं. एसआईटी गठित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कदम का स्वागत है क्योंकि वर्षों से बंद मामलों की दोबारा जांच एसआईटी के कारण ही हो सकी।
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