पंजाब में ‘मेरी दुकान, मेरे नाम’ योजना शुरू : पुराने किरायेदारों को मिलेगा मालिकाना हक

by

12 साल से वैध कब्जे या किरायेदारी वाले दुकानदार कर सकेंगे आवेदन; आय वर्ग के अनुसार कलेक्टर रेट पर 12.5 से 100 प्रतिशत तक भुगतान

चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों की दुकानों पर लंबे समय से कारोबार कर रहे दुकानदारों को मालिकाना हक देने के लिए ‘मेरी दुकान, मेरे नाम’ योजना शुरू की है। योजना के तहत पात्र दुकानदार आज से संबंधित कार्यालयों में आवेदन कर सकेंगे।

कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि 1 अप्रैल 2020 से पहले से कम से कम 12 वर्षों से दुकान पर कानूनी रूप से काबिज या वैध किरायेदार दुकानदार इस योजना के तहत मालिकाना हक के लिए आवेदन कर सकेंगे।

एसडीएम स्तर पर होगी पात्रता की जांच

बैंस ने बताया कि लंबे समय से स्थानीय निकायों की दुकानों पर कारोबार कर रहे दुकानदार मालिकाना हक देने की मांग कर रहे थे। सरकार ने इसी मांग को देखते हुए यह योजना शुरू की है।

आवेदन के बाद एसडीएम स्तर पर गठित कमेटी दुकानदार की पात्रता और दस्तावेजों का सत्यापन करेगी। इसके बाद दुकान की कीमत तय करने के लिए एसडीएम स्तर की प्राइस फिक्सेशन कमेटी और डीसी स्तर की प्राइस फिक्सेशन कमेटी प्रक्रिया पूरी करेंगी।

मालिकाना हक देने की अंतिम प्रक्रिया संबंधित स्थानीय निकाय के सदन के माध्यम से पूरी होगी। नगर निगम की दुकान का मामला निगम सदन, नगर परिषद की दुकान का मामला परिषद और नगर पंचायत की दुकान का मामला संबंधित नगर पंचायत के सदन में रखा जाएगा।

आय के अनुसार मिलेगी बड़ी रियायत

योजना के तहत दुकानदारों को कलेक्टर रेट पर आय वर्ग के अनुसार रियायत दी गई है।

  • ईडब्ल्यूएस: 3 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वालों को कलेक्टर रेट का 12.5 प्रतिशत देना होगा।
  • एलआईजी: 3 लाख से अधिक और 8 लाख रुपये तक की आय वालों के लिए 25 प्रतिशत।
  • मिडिल इनकम ग्रुप: 8 लाख से 13 लाख रुपये तक की आय वालों के लिए 50 प्रतिशत।
  • 13 लाख रुपये से अधिक आय: कलेक्टर रेट का 100 प्रतिशत भुगतान करना होगा।

इसके अलावा 50 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल वाली दुकानों के लिए भी रियायती दर का प्रावधान किया गया है। ऐसी दुकानों के लिए कलेक्टर रेट का 50 प्रतिशत भुगतान करना होगा।

अवैध कब्जे योजना से बाहर

मंत्री ने स्पष्ट किया कि योजना का लाभ केवल कानूनी रूप से काबिज या वैध किरायेदार दुकानदारों को ही मिलेगा। पार्क, गली या अन्य सार्वजनिक जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।

दुकानदार अपनी कानूनी कब्जेदारी या किरायेदारी साबित करने के लिए जीएसटी प्रमाणपत्र, बिल, फर्म पंजीकरण और अन्य संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कर सकेंगे।

सरकार के अनुसार योजना में किसी प्रकार की सब्सिडी का प्रावधान नहीं है। मालिकाना हक देने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और सत्यापन के आधार पर पूरी की जाएगी।

Share
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

You may also like

article-image
पंजाब

ड्रग्स और हथियार तस्करी का पर्दाफाश : ICE ड्रग्स व 5 पिस्तौल बरामद

अमृतसर :  कमिश्नरेट पुलिस ने सीमा पार से चल रहे एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए नशे और हथियारों की तस्करी करने वाले तीन लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय...
article-image
पंजाब

गांव चूहड़पुर की संगत द्वारा एक निःशुल्क मेडिकल कैंप लगाया : डॉक्टरों ने 70 मरीजों का चेकअप का मुफ्त दवाइयां की वितरित

नवांशहर । शिरोमणि संत कबीर साहिब जी के 628वें तथा श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के 431वें प्रकाश पर्व के अवसर पर गांव चूहड़पुर की समस्त संगत द्वारा एक निःशुल्क मेडिकल कैंप लगाया गया,...
article-image
पंजाब

Hoshiarpur Beat Fatehgarh Sahib by 6

Hoshiarpur / Daljeet Ajnoha/June 03 :  Hoshiarpur’s Under-19 cricket team registered a convincing six-wicket win over Fatehgarh Sahib in the Boys’ Under-19 Inter-District Tournament organized by the Punjab Cricket Association. HDC A secretary Dr....
article-image
पंजाब

मिशन चढ़दी कला : पंजाब IAS ऑफिसर्स एसोसिएशन ने बाढ़ पीड़ितों के लिए 5 लाख रुपये का योगदान किया

चंडीगढ़: पंजाब राज्य के IAS ऑफिसर्स एसोसिएशन ने आज बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री के मिशन चढ़दी कला में 5 लाख रुपये का योगदान देने का निर्णय लिया है। एसोसिएशन के...
Translate »
error: Content is protected !!